रामबाड़ा: जंगल में मिले 2 और कंकाल
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केदारनाथ पैदल मार्ग से सटे जंगलों में रविवार को भी मानव कंकाल की तलाश की गई। इस दौरान रामबाड़ा के जंगल में दो मानव कंकाल मिले।
पिछले वर्ष जून में जलप्रलय से बचकर जंगलों में सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भागे लोगों की भूख-प्यास और बारिश में लगातार भीगने से मौत हो गई थी।
शासन के निर्देश पर गठित टीम ने जंगलों में लापता लोगों के शवों की तलाश की थी। तब टीम जंगलों से लगभग साढे़ तीन सौ शव ही बरामद कर पाई थी।
अब तक 38 मानव कंकाल हो चुके हैं बरामद
अब 11 जून से जंगलचट्टी और चीरवासा के जंगलों से मानव कंकाल मिलने की शुरुआत हुई। चार दिनों में जंगलचट्टी और रामबाड़ा के जंगलों से 38 मानव कंकाल बरामद हो चुके हैं।
रुद्रप्रयाग के एसपी बीजे सिंह ने बताया कि टीम में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) और निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी के अनुभवी पवर्तारोहियों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा पैदल मार्ग पर कार्य कर रहे मजदूरों को भी बताया गया है कि कंकाल दिखने पर पुलिस को सूचित करे।
नेपाल के सेना प्रमुख पहुंचे गंगोत्री धाम
नेपाल के आर्मी चीफ जनरल गौरव शमशेर जंग बहादुर राणा ने रविवार को परिवार सहित गंगोत्री धाम के दर्शन किए।
गंगा घाट पर पितरों को तर्पण देने के साथ ही उन्होंने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। सोमवार को जनरल राणा यमुनोत्री धाम की यात्रा करेंगे।
सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात जवान की मौत
नेपाल के सेना प्रमुख की सुरक्षा ड्यूटी के लिए खरसाली में तैनात उत्तराखंड पुलिस के एक जवान की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
फायर सर्विस के जवान 42 वर्षीय ससियाराम पुत्र गंगा राम निवासी कुवानू चकराता की ड्यूटी खरसाली में लगाई गई थी। रविवार सुबह करीब नौ बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।
मूल प्रवाह क्षेत्र में बहने लगी मंदाकिनी
मंदाकिनी नदी फिर से अपने मूल प्रवाह क्षेत्र में बहने लगी है। केदारनाथ मंदिर के पीछे और चोराबाड़ी झील के नीचे मंदाकिनी नदी को पुराने प्रवाह क्षेत्र में जुटे निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी को सफलता मिल गई है।
निम ने वायरक्रेट की दीवार और सैंड बैगा लगाकर पानी की धारा को मोड़ दिया है। अब मंदाकिनी नदी का लगभग 95 फीसदी पानी मंदिर के बायीं ओर के बजाय दायीं ओर से बहने लगा है।
ठीक एक साल पहले अतिवृष्टि के दौरान ग्लेशियर टूट गए थे। चोराबाड़ी झील टूट गई थी। इस पानी ने बडे़-बड़े बोल्डरों के साथ मिलकर केदारनाथ सहित अन्य क्षेत्र में भारी तबाही मचाई।
मंदिर के लिए हो सकती थी खतरा
मंदाकिनी नदी अपने मूल प्रवाह के बजाय मंदिर के पीछे से होते हुए सरस्वती नदी के साथ दायीं ओर से बहने लगी थी। यदि नदी के रुख को मोड़ा नहीं जाता, तो मंदिर के लिए खतरा हो सकता था।
इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने निम और सिंचाई विभाग को नदी को मूल प्रवाह क्षेत्र में मोड़ने और सुरक्षा दीवारों के निर्माण का जिम्मा दिया था। निम ने सात जून से नदी के प्रवाह को मोड़ने का काम शुरू किया था।
एक हफ्ते के अंदर निम ने वायरक्रेट की दीवार और सैंड बैग की मदद से मंदाकिनी नदी की धारा को डायवर्ट कर दिया।