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नेपाल के बझांग जिले में भूस्खलन से 20 घर बहे, एक ही परिवार के छह लोग जिंदा दफन 

Sat, 04 Jul 2020 07:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, बैतड़ी (नेपाल)
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, बैतड़ी (नेपाल) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 04 Jul 2020 07:34 PM IST
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Six people of same family buried alive in landslide in Nepal Bazhang district
प्रतीकात्मक तस्वीर
नेपाल के बझांग जिले के केदारसु नगर पालिका वार्ड नंबर आठ के मल्लेसी में भूस्खलन से एक परिवार के छह लोग जिंदा दफन हो गए, जबकि एक व्यक्ति लापता है। छह लोगों के शव नेपाल प्रहरी ने बरामद कर लिए हैं। 
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नेपाल प्रभारी से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात हुई बारिश के साथ गांव के ऊपर से आए भूस्खलन ने केदारसु नगरपालिका आठ के मल्लेसी में 20 घरों को बहा दिया था।
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रात में भूस्खलन की जानकारी के बाद घर के अंदर मौजूद अन्य लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन भूस्खलन में सात लोग दब गए। इनमें डेल जेथरा (81), देवी जेथरा (43) शांति जेथरा (16), प्रयाग जेथरा (16), संतू जेठारा (15), अस्मिता जेथरा (13) के शव मिल गए हैं, जबकि गिरी जेथरा अभी लापता है।

भूस्खलन ने 22 भैंसों, 65 बकरियों और 24 गायों को भी बहा दिया। भूस्खलन के बाद बस्ती के मध्य हिस्से में 65 परिवार रह रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, भूस्खलन से खेती करने और खेती करने वाली करीब आधी जमीन भूस्खलन की जद में आई है।

और आसान होगा स्थानीय मौसम को पढ़ना

इस बार मानसून में न सही, लेकिन अगले मानसून में उत्तराखंड में मौसम को पढ़ पाना वैज्ञानिकों के लिए और आसान हो जाएगा। अगले साल प्रदेश में दो डॉप्लर रडार काम करना शुरू कर देंगे। जिसके बाद मौसम की स्थानीय स्तर पर भविष्यवाणी और अधिक सटीक हो जाएगी। विश्व बैंक के सहयोग से प्रदेश में उत्तराखंड हाइड्रोमेट परियोजना शुरू की गई थी।

इसमें भारतीय मौसम विभाग से एमओयू किया गया था। इसके तहत प्रदेश में करीब 180 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज या बारिश मापी स्थापित किए गए हैं। इस समय इनमें से 100 से ज्यादा केंद्रों से जानकारी मिलने लगी है और आईएमडी को डाटा भी भेजा जा रहा है। इसका सबसे अधिक फायदा चार धाम यात्रियों को होगा।
 

डॉप्लर रडार से अब टेस्टिंग शुरू

वहीं, अच्छी खबर यह भी है कि मुक्तेश्वर में स्थापित डॉप्लर रडार से अब टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसी तरह प्रदेश में एक और डॉप्लर रडार स्थापित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले मानसून में इन दोनों के शुरू होने से मौसम का अंदाजा लगाने में खासी आसानी हो जाएगी।

100 और का प्रस्ताव भेजा

राज्य आपदा प्रबंधन के अधिकारियों के मुताबिक हाइड्रोमेट के तहत 100 और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन व रेन गेज स्थापित करने का प्रस्ताव आईएमडी को भेजा जा चुका है। जिससे स्थानीय मौसम का अनुमान लगाना काफी आसान हो जाएगा।

अभी हम आईएमडी पूना को डाटा भेज रहे हैं। फॉरकास्ट का अधिकार उन्हीं का है। इतना जरूर है कि सौ से अधिक स्टेशन से डाटा जारी होने से फॉरकास्टिंग और अधिक सही हुई है।
- गिरीश चंद्र जोशी, वरिष्ठ परामर्शदाता, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

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