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महंगा होने के बाद भी यूपी की एजेंसी को काम

Sat, 20 Sep 2014 10:21 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 20 Sep 2014 10:21 AM IST
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उत्तराखंड में सरकारी पैसे को खर्च करने में अफसर कितने ‘दिलदार’ हैं, इसका उदाहरण सितारगंज में स्थापित होने वाले सिडकुल-2 में बिजली के कार्यों के लिए दी गई ठेकेदारी से मिलता है।

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महंगे होने के बाद भी बाहरी एजेंसी से बिजली के कार्य कराने की हरी झंडी पर सीएम ने तो रोक लगा दी मगर सिडकुल के अफसर इस हुक्मनामे को भी टालमटोल रवैया अपना कर असरहीन करने की फिराक में हैं।
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सिडकुल-2 के लिए बिजली का काम कराया जाना है। सिडकुल के अफसर चाहते थे कि काम अंडरग्राउंड हो। भूजल स्तर बहुत ऊपर होने से दिक्कत हो सकती है।

बाहरी एजेंसी यूपीआरएनएन ने इस कार्य की 130 करोड़ की प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) दी। सीमेंस, हैवल्स व यूपीसीएल ने संयुक्त रूप से इस काम को 80 करोड़ करने को कहा।
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यूपीसीएल को देने की बात

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मगर सिडकुल अफसरों की मेहरबानी से यूपीआरएनएन को इस कार्य की 118.78 करोड़ की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई। इस आशय का प्रस्ताव 21 अक्तूबर 2013 की सिडकुल बोर्ड बैठक में रखा गया। लेकिन निदेशक की हैसियत से तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा बीपी पांडे ने कार्य को यूपीसीएल को देने की बात कही।

विवाद बढ़ा तो तत्कालीन एमडी शैलेश बगोली ने 15.5.2014 को यह पत्रावली सीएम हरीश रावत के समक्ष प्रस्तुत की।

सीएम ने फाइल पर लिखा कि राज्य सरकार की कंपनी यूपीसीएल को ही काम दिया जाए। लेकिन इस आदेश का पालन करने से बचने के लिए बोर्ड बैठक को लगातार टाला जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मामले को लंबा खींचकर पुन: यूपीआरएनएन को काम दिए जाने की जुगत भिड़ाई जा रही है।

ऊपर और नीचे के काम में छुपा खेल

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सिडकुल-2 में इलेक्ट्रिकल वर्क्स में जमीन के नीचे और ऊपर होने में लागत भी घट बढ़ रही थी। अंडरग्राउंड वर्क की लागत कई गुना थी। इसलिए यही कराने के लिए दबाव बनाया गया। एक्सपर्ट्स का दावा है कि सितारगंज में जल स्तर इतने ऊपर है कि यदि अंडरग्राउंड काम हुआ तो दुर्घटनाएं होंगी। इसलिए यूपीसीएल ने भी यही दावा किया। सारे काम को ऊपर करने के लिए लागत 22 करोड़ तय की। लेकिन कुछ बडे़ अफसर अंडरग्राउंड काम कराने पर अड़े हैं।

हर चीज के यूपीआरएनएन के रेट हाई
50 कॉम्पैक्ट सब स्टेशन बनने थे। यूपीआरएनएन ने एक स्टेशन के लिए 3445700 रुपये का रेट दिया और सीमेंस कंपनी ने टैक्स समेत एक स्टेशन के लिए 1608714 रुपये बताए। दोनों के रेट में नौ करोड़ रुपये का अंतर था।

195 रनिंग मैन यूनिट्स स्थापित होनी थी। एक यूनिट केलिए यूपीआरएनएन ने 535915 रुपये का रेट दिया और सीमेंस ने टैक्स समेत 329555 रुपये की दर प्रस्तुत की। दोनों का अंतर करीब चार करोड़ है।

11 केवी के 1000 मीटर केबल खरीद के लिए यूपीआरएनएन ने 4621 रु. प्रति मीटर की दर दी और हैवल्स ने 1712 रु. प्रतिमीटर का रेट दिया। दोनों के रेट से कुल खरीद में तीन करोड़ का अंतर है।

11केवी के ही दूसरी श्रेणी के 25000 मीटर केबल की खरीद के लिए यूपीआरएनएन ने 3809 रु. प्रति मी. का रेट दिया लेकिन हैवल्स ने 1127 रु. प्रति मी. की दर पेश की। दोनों की खरीद में करीब सात करोड़ का अंतर है।

33 केवी के 6000 मी. केबल के लिए यूपीआरएनएन ने 5615 रु. प्रति.मी. व हैवल्स ने 2061 रु.प्रति मी. का रेट दिया। दोनों के खरीद मूल्य का अंतर करीब दो करोड़ रुपये है।

33 केवी के तीन गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन बनाने के लिए यूपीआरएनएन ने एक के लिए 12.91 करोड़ और यूपीसीएल ने नौ करोड़ की लागत दर प्रस्तुत की। दोनों में करीब 2 करोड़ का अंतर है।

सीएम के आदेश के बावजूद मामला क्यों निस्तारित नहीं हो सका, यह पड़ताल का विषय है। बोर्ड की बैठक बुलाने में क्यों विलंब हो रहा है देखना पड़ेगा।
सुभाष कुमार, अध्यक्ष सिडकुल बोर्ड

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