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Shardiya Navratri 2023: लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र मां डाट काली मंदिर, शनिवार को चढ़ाएं ये खास चीजें

Sat, 14 Oct 2023 05:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sat, 14 Oct 2023 05:38 PM IST
सार

मां डाट काली मंदिर की स्थापना 219 साल पहले शिवालिक की पहाड़ियों में हुई थी। मंदिर अपने आप में विशेष मान्यता संजोय हुए है। शनिवार को मां डाट काली को लाल फूल, नारियल और लाल चुनरी चढ़ाने का विशेष महत्व है।

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Siddhapeeth Maa Daat Kali Temple Dehradun shardiya navratri 2023
डाट काली मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मोहंड में स्थित सिद्धपीठ मां डाट काली मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मां डाट काली मंदिर में शीश झुकाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। मां डाट काली उत्तराखंड के साथ ही पश्चिम उत्तर प्रदेश की ईष्ट देवी हैं। नवरात्र में देशभर से लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं।

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दून से सात किमी दूर सहारनपुर रोड पर स्थित मां डाट काली मंदिर की स्थापना 219 साल पहले शिवालिक की पहाड़ियों में हुई थी। मंदिर अपने आप में विशेष मान्यता संजोय हुए है। शनिवार को मां डाट काली को लाल फूल, नारियल और लाल चुनरी चढ़ाने का विशेष महत्व है। कोई भी नया वाहन लेने पर मंदिर में आकर दर्शन कर वाहन पर लाल चुनरी बांधते है।
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शुभ कार्य करने से पहले करते हैं भक्त मां के दर्शन
वहीं, उत्तराखंड के साथ ही देशभर से भी भक्त शुभ कार्य करने से पहले मां के दर्शन करते हैं। मंदिर के महंत रमन प्रसाद गोस्वाामी बताते हैं कि 1804 से पहले मंदिर आशारोड़ी के समीप एक जंगल में हुआ करता था।
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तब अग्रेंजों के समय सहारनपुर रोड पर टनल का निर्माण किया जा रहा था, लेकिन संस्था इसके निर्माण के लिए जितना खोदती थी उतना ही मलबा वहां दोबारा भर जाता था। तब मां घाठेवाली ने महंत के पूर्वजों के सपने में आकर मंदिर को टनल के पास स्थापित करने की बात कही थी। इसके बाद मंदिर को 1804 में वहां से हटाकर टनल के पास स्थापित किया गया था।

घाठेवाली देवी के बाद पड़ा था डाटकाली नाम
मां डाट काली का नाम पहले घाठेवाली देवी हुआ करता था। महंत रमन गोस्वामी ने बताया कि मंदिर की स्थापना के बाद ही मां घाठेवाली का नाम डाटकाली पडा था। दरअसल, गांवो में सुरंग को डाट कहा जाता है। उस समय मंदिर की स्थापना भी सुरंग के पास हुई थी। इसलिए मां का नाम डाट काली पड़ गया।

101 साल से लगातार जल रही अखंड ज्योति
मंदिर में करीब 101 साल से लगातार अखंड ज्योति जल रही है। मंदिर में मां डाट काली के साथ ही हनुमान, गणेश सहित अन्य भगवानों की प्रतिमा भी स्थापित हैं। भक्त मां के दर्शन के बाद भगवान के दर्शन करते हैं।

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मां भद्रकाली के दर्शन के बाद ही पूर्ण होती है यात्रा
मां डाट काली के दर्शन के बाद उनकी बहन मां भद्रकाली के दर्शन किए जाते हैं। उनके दर्शन के बाद ही भक्तों की यात्रा पूर्ण मानी जाती है। मां भद्रकाली का मंदिर भी मां डाट काली मंदिर के पास स्थित टनल से सौ मीटर आगे ही स्थापित है।

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