अंग्रेजी ने दिया 'धोखा', सीख रहे हैं हिंदी के गुरुमंत्र
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राजधानी देहरादून के करीब बीस हजार कान्वेंट से पढ़े छात्रों के लिए इंग्लिश रोजगार में बाधक बन गई है। दारोगा भर्ती परीक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से इंग्लिश विकल्प हटाने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ गई है।
ऐसे युवा दारोगा बनने के लिए अब हिंदी का रट्टा मार रहे हैं। सेलेक्शन में धोखा न हो, इसलिए दिग्गजों को खोज गुरुमंत्र लिए जा रहे हैं। कुछ छात्र बाकायदा हिंदी की कोचिंग भी ले रहे हैं।
फिजिकल टेस्ट के साथ लिखित परीक्षा
मार्च 2014 में दारोगा के 339 पदों के लिए भर्ती होनी है। फिजिकल टेस्ट के साथ लिखित परीक्षा भी होगी। प्रकिया बदलकर इस बार लिखित परीक्षा में अंग्रेजी का विकल्प खत्म कर दिया गया है।
यही बदलाव पूरे राज्य के कान्वेंट से पढ़े युवाओं पर पहाड़ की तरह टूटा है। आम तौर पर माना जाता है कि कान्वेंट स्कूलों से पढ़े छात्रों को सिर्फ बोलचाल की ही हिंदी आती है। न लेखन, न हिंदी ग्रामर, दोनों में उनके हाथ कच्चे ही रहते हैं। मगर सरकारी नौकरी के ‘क्रेज’ के कारण दारोगा बनने के इच्छुक युवा हिंदी सीखने में जुट गए हैं।
हिंदी की कोचिंग ले रहे हैं अभ्यर्थी
टिहरी के बादशाहीथौल निवासी अंकित बडोनी बताते हैं कि हिंदी के प्रवक्ता से कोचिंग ले रहा हूं। लेखनी में मात्राएं गलत हो जाती हैं। कोशिश यही होगी कि दारोगा की परीक्षा में कम से कम गलती हो।
ऋषिकेश के ढालवाला निवासी अंकित नेगी ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाई की है। तमिलनाडु से बीटेक के बाद एसआई का फॉर्म भरा है। पूरी पढ़ाई अंग्रेजी में की। अब देहरादून में हिंदी की कोचिंग ले रहा हूं।
धर्मपुर में निवासी हिंदी के रिटायर्ड प्रवक्ता राम प्रकाश जखमोला बताते हैं कि इन दिनों कई युवाओं ने हिंदी पढ़ने के लिए संपर्क साधा है। यह पहली बार होगा कि युवा प्रतियोगी परीक्षा के लिए हिंदी की कोचिंग ले रहे हैं।