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मिसाल : स्वरोजगार कर प्रेरणा बनीं श्वेता और सृष्टि, कई लोगों को दिया रोजगार 

Sun, 22 Dec 2019 10:12 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 22 Dec 2019 10:12 AM IST
सार

  • डेढ़ साल पहले चार गायों से शुरू किया था स्वरोजगार, आज 40 गायों से प्रतिदिन हो रहा 600 लीटर दुग्ध उत्पादन
  • प्लास्टिक पैकिंग के बजाय कांच की बोतल में दूध देकर जगा रहीं पर्यावरण संरक्षण की अलख

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Shweta and Srishti became inspiration for all after self-employment
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

सरकारी सेवा और निजी क्षेत्र की कंपनियों में मोेटी सैलरी से ही भविष्य सुरक्षित नहीं होता। अगर प्रभावी योजना और पूरी लगन के साथ स्वरोजगार को आर्थिकी का जरिया बनाया जाए तो उज्ज्वल भविष्य की गारंटी सुनिश्चित है। कुछ यही संदेश दे रही हैं दून की श्वेता अग्रवाल और सृष्टि काला।

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इन्होंने डेढ़ साल पहले पशु पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया था। आज दोनों महिला उद्यमी स्वरोजगार के क्षेत्र में लोगों के लिए प्रेरण बनीं हुई हैं। इस पेशे से उन्होंने 22 लोगों को भी रोजगार दिया है। श्वेता और सृष्टि ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष पहले चार गायों से स्वरोजगार की शुरुआत की थी।
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तब उनके लिए यह पेशा बिल्कुल नया था, लेकिन उन्होंने पूरी लगन और मेहनत से इस काम को अंजाम दिया। थोड़ा समय लगा, लेकिन धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा। बताया कि आज उनके शिमला बाईपास रोड स्थित प्लांट में 40 गायें हैं, इनमें साहीवाल और  एचफ (हाल्सहाइम फ्रिजन) गायें शामिल हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 600 लीटर दुग्ध उत्पादन होता है। 
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दूध का दाम बाजार की तुलना में थोड़ा कम रखा गया

बताया कि उनके यहां दूध का दाम बाजार की तुलना में थोड़ा कम रखा गया है। साहीवाल का दूध बाजार में 85 रुपये प्रति किलो मिलता है, लेकिन वह 75 रुपये देते हैं। ऐसे ही एचएफ के दूध का दाम दो रुपये कम 58 रुपये प्रति किलो रखा है। श्वेता ने कहा कि उनके पति शोभित अग्रवाल उनका पूरा सहयोग करते हैं। सृष्टि ने कहा कि उनके पति विनय काला ने उन्हें हर समय प्रेरित किया है।

प्लास्टिक पैकिंग का बहिष्कार कर जगा रहीं पर्यावरण संराक्षण की अलख

सामान्य तौर पर बाजार में दूध प्लास्टिक की पैकिंग में मिलता है, जो व्यवसाय की दृष्टि से किफायती साबित होता है, लेकिन श्वेता और सृष्टि प्लास्टिक पैकिंग का बहिष्कार कर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रही हैं। वह ग्राहक को कांच की बोतल में दूध बेचती हैं। ग्राहक को दूध ले जाने के बाद बोतल वापस करनी होती है।

22 कर्मचारियों को भी मिला रोजगार

दोनों महिला उद्यमियों के इस पेशे में 22 कर्मचारियों को भी रोजगार मिला है, जो गायों की देखभाल के साथ ही दुग्ध उत्पादन और डिलीवरी करने का काम संभालते हैं। 

‘गो सेवा में आता है आनंद’ 

सृष्टि और श्वेता ने कहा कि यह स्वरोजागर बिल्कुल अलग है। इसमें आपको आर्थिकी के साथ ही गो सेवा का भी मौका मिलता है। कहा कि वे गायों को सिर्फ आय का साधन नहीं समझतीं। बल्कि, गायों की माता के रूप में सेवा करती हैं। उनके रहने और खाने की विशेष व्यवस्था की जाती हैं। कर्मचारी भी पूरे मन से सेवा में लगे रहते हैं।

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