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इस बार श्राद्ध के समापन पर बेहद शुभ संयोग

Fri, 25 Sep 2015 10:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Sep 2015 10:18 PM IST
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shradh tarpan will starts from 27 september.

27 सितंबर यानी पूर्णिमा तिथि को दोपहर 12 बजे से श्राद्ध शुरू हो रहे हैं। इस बार श्राद्ध पक्ष का समापन 12 अक्तूबर को सोमवती अमावस्या के दिन हो रहा है। शास्त्रों में इस तिथि को बेहद शुभ माना जाता है।

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वेद के अनुसार पितरों को वसुगण, पितामहों को रुद्रगण और प्रपितामहों को आदित्यगण कहा गया है। ये सभी पितर जगतगुरु विष्णु के ही अंश हैं। शास्त्र कहते हैं कि पितृ ही जनार्दन हैं, पितृ ही ब्रह्म हैं। 28 सितंबर को पहला श्राद्ध है। शास्त्र कहते हैं कि श्राद्ध कर्म से ही पुत्र पितृ ऋण से मुक्त हो सकता है। इसीलिए शास्त्रों में श्राद्ध करने की अनिवार्यता बताई गई है।
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ऐसे में पुत्र-पौत्रादि का यह कर्तव्य होता है कि वे अपने पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक ऐसे शास्त्रोक्त कर्म करें, जिससे उन मृत प्राणियों को परलोक अथवा अन्य लोक में भी सुख प्राप्त हो सके। इसलिए शास्त्रों में मृत्यु पश्चात, और्ध्वदैहिक संस्कार, पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिंडीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्मविपाक आदि के द्वारा पापों के विधान का प्रायश्चित कहा गया है।
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श्राद्ध कैसे करें
जिस दिन आप के घर में श्राद्ध की तिथि हो, उस दिन सूर्योदय से लेकर दिन के 12 बजकर 24 मिनट की अवधि के मध्य श्रद्धा करें। प्रयास करें कि इससे पहले ही ब्राह्मण से तर्पण आदि करा लिए जाएं। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगाजल, मधु, वस्त्र, कुश अभिजित मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से अनिवार्य हैं।

इनसे करें परहेज

shradh tarpan will starts from 27 september.

श्राद्ध तिथि वाले दिन तेल लगाने, दूसरे का अन्न खाने और स्त्री प्रसंग से परहेज करें। श्राद्ध में राजमा, मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हड़ा, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज-लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, कैंथ, महुआ और चना ये सब वस्तुएं वर्जित हैं।

इनका कर सकते हैं सेवन
धान, गेहूं, जौ, तिल, सरसों का तेल, मूंग आदि ग्रहण कर सकते हैं, इसके अलावा आम, आंवला, अनार, खीरा, नारियल, खजूर का सेवन भी अच्छा माना जाता है। केले का फल श्राद्ध में ना चढ़ाना चाहिए, ना ही सेवन करना चाहिए।

ये जरूर करें
- इस दिन निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोने चाहिए। इस कार्य के समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।
- ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी, गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
- गाय के लिए पत्ते पर ‘गोभ्ये नम:’ मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री निकालें।
- कुत्ते के लिए भी ‘द्वौ श्वानौ नम:’ मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री निकालें।
- कौए के लिए ‘वायसेभ्यो नम:’ मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
- देवताओं के लिए ‘देवादिभ्यो नम:’ मंत्र पढ़कर और चींटियों के लिए ‘पिपलीकादिभ्यो नम:’ मंत्र पढ़कर चींटियों के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें। इसके बाद भोजन के लिए थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसें।
- दक्षिणाभिमुख होकर कुश, तिल और जल लेकर पितृतीर्थ से संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन के उपरांत यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें।
ये सरल उपाय श्रद्धापूर्वक करने  से पितर तृप्त होते हैं और वे आशीर्वाद देने के लिए विवश हो जाते हैं। आपके कार्य व्यापार, शिक्षा अथवा, वंश वृद्धि में आ रही रुकावटें दूर होंगी।

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