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पितृपक्ष 2018: आगामी 24 सितंबर से शुरु होंगे श्राद्ध, जानिए इनके बारे में ये खास बात

Sat, 22 Sep 2018 08:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sat, 22 Sep 2018 08:20 AM IST
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shradh 2018 importance of shradh
shradh

प्रतिवर्ष आश्विन मास में प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से ही श्राद्ध आरंभ हो जाते है। इन्हें सोलह श्राद्ध भी कहते हैं। श्राद्ध महापर्व 24 सितंबर से शुरू हो रहा है। यह 8 अक्टूबर तक सर्वपितृ श्राद्ध तक चलेगा। इस दौरान लोग अपने पितरों का पिंडदान करेंगे।

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ज्योतिषाचार्य पीयूष भट्नागर बताते हैं कि श्राद्ध के महत्व के बारे में कई प्राचीन ग्रंथों तथा पुराणों में वर्णन मिलता है। श्राद्ध का पितरों के साथ बहुत ही घनिष्ठ संबंध है।

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पितरों को आहार तथा अपनी श्रद्धा पहुंचाने का एकमात्र साधन श्राद्ध है। मृतक के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिंड तथा दान ही श्राद्ध कहा जाता है। यदि मृतक व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार देव योनि मिलती है तो श्राद्ध के दिन ब्राह्मण को खिलाया गया भोजन उन्हें अमृत रुप में प्राप्त होता है।  

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इन तिथियों को होंगे श्राद्ध 

24 सितंबर 2018 पूर्णिमा श्राद्ध 
25 सितंबर 2018 प्रतिपदा श्राद्ध 
26 सितंबर 2018 द्वितीय श्राद्ध 
27 सितंबर 2018 तृतिया श्राद्ध 
28 सितंबर 2018 चतुर्थी श्राद्ध 
29 सितंबर 2018 पंचमी श्राद्ध 
30 सितंबर 2018 षष्ठी श्राद्ध 
1 अक्टूबर 2018 सप्तमी श्राद्ध 
2 अक्टूबर 2018 अष्टमी श्राद्ध 
3 अक्टूबर 2018 नवमी श्राद्ध 
4 अक्टूबर 2018 दशमी श्राद्ध 
5 अक्टूबर 2018 एकादशी श्राद्ध 
6 अक्टूबर 2018 द्वादशी श्राद्ध 
7 अक्टूबर 2018 त्रयोदशी/चतुर्दशी श्राद्ध 
8 अक्टूबर 2018 अमावस्या श्राद्ध 

 

पितृ पक्ष का महत्व

पंडित राजेश शर्मा बताते हैं देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी होता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व होता है।

 

वायु पुराण, मत्स्य पुराण, गरुण पुराण, विष्णु पुराण आदि पुराणों तथा अन्य शास्त्रों जैसे मनुस्मृति इत्यादि में भी श्राद्ध कर्म के महत्व के बारे में बताया गया है।

 

पूर्णिमा से लेकर अमावस्या के मध्य की अवधि अर्थात पूरे 16 दिनों तक पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिये कार्य किये जाते हैं। पूरे 16 दिन नियम पूर्वक कार्य करने से पितृऋण से मुक्ति मिलती है। पितृ श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।  

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