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Dehradun News: झूठी लाचारी दिखा बहू-बेटे को करना चाहा बेदखल, डीएम कोर्ट में सामने आई सच्चाई

Wed, 20 Aug 2025 11:44 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 20 Aug 2025 11:44 PM IST
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Showing false helplessness, he tried to evict his son and daughter-in-law, the truth came out in DM court
Iचलने-फिरने में सक्षम बुजुर्ग व्हीलचेयर पर बैठकर डीएम से लगाने पहुंचा था गुहार
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Iभरण-पोषण एक्ट में चली सुनवाई तो पता चला कि बुजुर्ग के सारे दावे झूठे
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Iचार वर्ष की पोती को भी कर दिया था बेदखल, डीएम ने मुकदमा किया खंडित
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Iएक बुजुर्ग ने झूठी लाचारी दर्शाकर बहू-बेटे पर मारपीट के आरोप लगाए। व्हीलचेयर पर बैठकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बुजुर्ग ने बहू-बेटे को घर से बेदखल करने के लिए भरण-पोषण एक्ट में कार्रवाई की मांग की। जिलाधिकारी कोर्ट में जब कार्यवाही शुरू हुई तो दो तारीखों में ही सच्चाई सामने आ गई। पता चला कि बुजुर्ग अच्छी खासी स्थिति में है। वह चल फिर ही नहीं बल्कि दौड़ने लायक है। उनका मारपीट का दावा भी झूठा निकला। बात यह भी सामने आई कि उलटे वही बेटे-बहू को पिटवा चुके हैं। इस तरह जिलाधिकारी ने मुकदमा खारिज करते हुए घर पर बहू-बेटे को ही काबिज करने के आदेश दिए हैं।

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Iजिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि संगीता वर्मा और उनके पति जुगल किशोर वर्मा पिछले दिनों कार्यालय पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने बहू-बेटे पर मारपीट का आरोप लगाया था और उन्हें फ्लैट से बेदखल करने की मांग की थी। इस पर जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में दंपती के बेटे अमन वर्मा के खिलाफ वाद चलाया गया। मामले में फास्ट ट्रैक सुनवाई शुरू की गई और जांच की गई। पता चला कि जुगल किशोर वर्मा एक राजपत्रित अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी मासिक आय 55 हजार रुपये है। उधर, उनका बेटा केवल 25 हजार रुपये कमाकर अपने परिवार का पोषण कर रहे हैं। जहां तक मारने-पीटने की बात है तो यह भी पता चला कि जुगल किशोर वर्मा ने अमन वर्मा को ही बाहर से लोगों को बुलाकर पिटवाया। इससे अमन वर्मा की चार वर्षीय बेटी भी परेशान हुई। उसका भी भविष्य दांव पर लग गया। इस बीच जांच में एक वीडियो भी सामने आया कि बुजुर्ग जुगल किशोर वर्मा चल फिर सकते हैं। वह खुद को लाचार बताकर व्हीलचेयर पर बैठकर आए थे। इस मामले में जुगल किशोर वर्मा का मुकदमा खारिज कर दिया गया है। साथ ही एसएसपी को अमन वर्मा और उनकी पत्नी मीनाक्षी वर्मा की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि पुलिस प्रत्येक महीने में दो बार उनके घर का निरीक्षण करे ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने इस मामले में कहा कि केवल बुजुर्ग होना लाचार बहू-बेटों को बेदखल करने का लाइसेंस नहीं है। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।I
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