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इस बार गर्मी में सूखे रह सकते हैं हलक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 02 Feb 2016 03:25 PM IST
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इस बार गर्मी में हलक सूखा रह सकता है। इसका कारण है बारिश का कम होना। पहले मानसून में कम बारिश हुई उसके बाद सर्दियों में भी बरसात नहीं हुई है।
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ऐसे में जल संस्थान के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़नी शुरू हो गई हैं। गर्मियों में इस बार पैदा होने वाली पेयजल किल्लत से निपटने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस मसले पर सोमवार को जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने अधिकारियों की बैठक ली।
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मुख्य महाप्रबंधक ने उत्तराखंड के महा प्रबंधकों को पत्र भेजकर पेयजल स्थिति के संबंध में पूर्व सूचना मांगी है, ताकि इस पर काम शुरू हो सके। सोमवार को गुप्ता ने नैनीताल के महाप्रबंधक और अन्य अधिकारियों संग बैठक की। इस मौके पर सभी शाखाओं के नोडल अधिकारियों को गर्मियों में टैंकरों के लिए अविलंब निविदाएं आमंत्रित कराए जाने को कहा गया।
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जहां जनरेटर की आवश्यकता हो, वहां भी पहले ही बताने को कहा गया। कहा गया है कि प्रत्येक शाखा अपने क्षेत्र में संचालन के लिए आवश्यकतानुसार टैंकरों के संचालकों को चिह्नित कर ले। सभी पंपिंग प्लांट्स की मरम्मत के लिए अविलंब टेंडर स्वीकृत कराने, समस्त पंपिंग प्लांट्स की मरम्मत करने आदि के दिशा-निर्देश दिए गए।
गुप्ता ने कहा कि इस बार बारिश नहीं होने की स्थिति में अधिकारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। बैठक में अधिकारी पीसी किमोठी, एचके पांडे आदि उपस्थित थे।
पानी की लाइन डाले जाने की मांग
कुआंवाला स्थित टीचर्स कॉलोनी के क्षेत्रवासियों ने पानी की लाइन बिछाने की मांग को लेकर सोमवार को जल संस्थान के अधिकारियों से मुलाकात की। क्षेत्रवासी पहले नेहरू कॉलोनी स्थित जल संस्थान मुख्यालय पहुंचे। यहां से मुख्य महाप्रबंधक ने उन्हें अधीक्षण अभियंता एलके अदलखा के पास भेज दिया।
अदलखा ने बताया कि क्षेत्र में कुछ नई आबादी बसी है, जहां पानी की लाइन नहीं है। शीघ्र ही क्षेत्र का निरीक्षण कर स्टीमेट तैयार किया जाएगा। इसके बाद लाइन डाली जाएगी।
सूखने लगे प्राकृतिक जल स्रोत
भले ही अभी गर्मी ने दस्तक नहीं दी है लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की कमी शुरू हो गई है। बारिश नहीं होने से इन स्रोतों का जलस्तर धीरे-धीरे घटना शुरू हो गया है इससे ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। नैनीताल जिले के 219 में से 34 प्राकृतिक जल स्रोत ऐसे हैं अगर जल्द ही बारिश नहीं होती है तो इनके जलस्तर में गिरावट आना तय माना जा रहा है।
बता दें इस बार बारिश नहीं होने से पानी का संकट अभी से गहराने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की परेशानी होने लगी है। ओखलकांडा ब्लाक में 59 योजनाओं में सूनी, गड़गड़ी, डालकन्या, पतलोट, नाई, नगदल व टीमरकांता नामक जल स्रोतों में पानी की कमी होने लगी है।
इसी तरह बेतालघाट ब्लाक के 40 योजनाओं में से घंघरेटी, बेतालघाट, धनियाखान, बजेड़ी, बसगांव व खैरनी, धारी ब्लाक के 29 योजनाओं में से शशगनी, सरना, मुक्तेश्वर, दुदली, धारी व मनाघेर, भीमताल ब्लाक की 50 योजनाओं में से तिरछाखेत, सोनगांव, रानीबाग, कहलक्वीरा, बल्दियाखान, गेठिया, ज्योलीकोट व नैनी भवाली, रामगढ़ ब्लाक की 41 योजनाओं में से मल्ला रामगढ़, मौना, श्यामखेत, लोसज्ञानी,गहना व सूपी के प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी कम होने लगा है।
दफ्तर पहुंचते ही घनघगाने लगे हैं फोन
फरवरी महीने की पहली तारीख है सुबह 10 बजे दफ्तर में पहुंचते ही गांवों से जनप्रतिनिधियों तथा कई ग्रामीणों के फोन आने शुरू हो गए हैं कि फला गांव में पानी नहीं आ रहा है अपराह्न एक बजे तक यही सिलसिला रहा। कुछ लोगों ने तो सुबह से ही मोबाइल पर फोन करना शुरू कर दिया था। यह कहना है जल संस्थान के ईई जगदीप चौधरी का। फोन आने से रोजमर्रा के नियमित दफ्तर के काम भी प्रभावित हुए। चौधरी के मुताबिक बारिश नहीं होने से अबकी बार पेयजल संकट होना तय है।
रोस्टर के मुताबिक हो रहा है पेयजल वितरण
नैनीताल जिले में प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की कमी होना बेहद चिंता का विषय है। जिन गांवों में पेयजल समस्या हो रही है फिलहाल उन गांवों में रोस्टर के मुताबिक पानी का वितरण किया जा रहा है। विभागीय उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत करा दिया है।
ग्रीष्मऋतु में पेयजल से प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर उनमें पेयजल समस्या के समाधान के लिए कार्य योजना बना दी है। इन सभी क्षेत्रों में टैंकर से पानी की आपूर्ति की जाएगी। नगरीय क्षेत्र के लिए 1.15 ला तथा ग्रामीण क्षेत्र के लिए 46. 89 साख की योजना बनायी गयी है।