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500 साल बाद शिवरात्रि पर बना यह अनोखा योग
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 24 Feb 2014 08:17 PM IST
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महा शिवरात्रि पर इस बार विशेष योग बन रहे हैं। ज्योतिर्विदों की माने तो शिव पार्वती योग पूरे 500 वर्ष बाद पड़ा है।
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कईं ग्रहों के राशि परिवर्तन के कारण ऐसे योग का वर्णन पिछले 500 वर्षों में कहीं नहीं मिला। शिव पार्वती योग को शिवशक्ति अथवा शंभूसती योग भी नाम दिया गया है।
अत्यंत पवित्र योग
भारतीय संस्कृति में शिवरात्रि को ज्ञानपर्व माना गया है। जिस प्रकार दीपावली लक्ष्मी प्राप्ति का योग बनाती है उसी प्रकार महारात्रि शक्ति के योग के लिये जानी गयी है। 27 फरवरी को बन रहा शिव पार्वती योग अत्यंत पवित्र योग है।
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अत्यंत शुभ
ज्योतिषाचार्य डॉ प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि जब तीन अशुभ ग्रह चर राशि में आएं तथा तीन शुभ ग्रह भी चर राशि में आ जाएं तब यदि चंद्रमा और शिव का प्रिय नक्षत्र श्रवण पड़ जाए तो यह योग बनता है। शिव महापुराण में शिव पार्वती, शंभूसती और शिव शक्ति योग को अत्यंत शुभ माना गया है।
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तीनों शुभ ग्रह मकर राशि में आ गए
इस बार राहु, शनि और मंगल तीनों तुला राशि में हैं। इन तीनों ग्रहों को शिव के समान पुरुष ग्रह माना गया है। डॉ मिश्रपुरी बताते हैं कि चंद्रमा, बुध और शुक्र तीनों शुभ ग्रह मकर राशि में आ गए हैं। ये तीनों स्त्री ग्रह हैं।
कईं शास्त्रों में बुध को नपुंसक ग्रह भी माना गया है। संयोग यह कि श्रवण नक्षत्र महा शिवरात्रि के दिन पड़ रहा है। यह ऐसा नक्षत्र है जिससे भगवान शिव का पवित्र मास श्रावण बनता है।
डॉ मिश्रपुरी के अनुसार, महा शिवरात्रि की अर्द्धरात्रि में विशेष पूजा का विधान है। चार पहर पूजा करते हुए पहले प्रहर में दूध से, द्वितीय प्रहर में गन्ने के रस से, तृतीय प्रहर में गिलोय में तथा चतुर्थ प्रहर में गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। महा शिवरात्रि मेष, वृश्चिक, मिथुन और कन्या राशियों के लिये अत्यधिक फलदायी है।