पार्सल से राष्ट्रपति को लौटाया पद्मश्री, बताई वजह
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पर्यावरणविद् प्रो. शेखर पाठक ने बृहस्पतिवार को पद्मश्री अवार्ड राष्ट्रपति को पार्सल से भेज दिया। मैडल के साथ ही उन्होंने प्रमाण पत्र भी राष्ट्रपति को भेजा है। मालूम हो कि दो नवंबर 2015 को शैले हाल में आयोजित फिल्म फेस्टिवल के दौरान उन्होंने देश में असहिष्णुता के बढ़ने और उत्तराखंड की उपेक्षा के विरोध में अवार्ड लौटाने का ऐलान किया था।
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में प्रो. पाठक ने कहा कि देश में कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और पान शंकर की हत्या के बाद जब कुछ साहित्यकारों ने विरोध में अपने सम्मान लौटाए तो उनका माखौल उड़ाया गया।
इस पर बयान देने के दौरान सुधींद्र कुलकर्णी पर स्याही फेंकी गई। गुलाम अली के मुंबई में होने वाले कार्यक्रम में बाधा डाली गई।
संस्थानों में विशेष विचारधारा को जगह देने का विरोध
इसके अलावा फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट सहित आईआईटी जैसी संस्थाओं में भी खास विचारधारा के लोगों को बैठाने का प्रयास किया गया।
प्रो. पाठक ने पत्र में लिखा है कि उत्तराखंड के नागरिकों की उपेक्षा, खनिज और वन संपदा को बाहरी तत्वों द्वारा लूटे जाने के साथ ही हिमालय के पर्यावरणीय हितों को अनदेखी की जा रही है। गैरसैंण राजधानी के सवाल पर भी जनता के साथ बेहूदा मजाक हो रहा है। इन सब कारणों से वे पद्मश्री अवार्ड लौटा रहे हैं।