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साझा प्रस्ताव से मिलेगा 'गंदगी' से छुटकारा

Tue, 17 Sep 2013 04:52 PM IST
अमर उजाला, मनमीत रावत, देहरादून
अमर उजाला, मनमीत रावत, देहरादून Updated Tue, 17 Sep 2013 04:52 PM IST
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Sharing proposal will give relieve

राजधानी में डोर टू डोर कूड़ा उठान पर से काले बादल हटने की संभावना दिखने लगी है। मंगलवार को शासन में हुई बैठक के बाद नगर निगम प्रशासन भी दो कदम पीछे हटने को तैयार हो गया है और कूड़ा उठाने वाली कंपनी डीवीडल्यूएम भी।

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अब दो दिन में नगर निगम और कंपनी एक साझा प्रस्ताव तय करेंगे। जिसे शासन के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्ताव के बाद शासन निर्णय लेगा कि डोर-टू-डोर योजना का भविष्य किस ओर करवट ले।
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योजना से हाथ खीचने की दी थी चेतावनी

नगर निगम से अनुबंधित दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी ने टिपिंग फीस न बढ़ाने पर 16 सितंबर से योजना से हाथ खीचने की चेतावनी दी थी। जिस पर निगम प्रशासन ने भी बैक फुट पर आने से इंकार कर दिया था। इससे कंपनी और निगम के बीच कड़वाहट आ गई। मामला जब बढ़ा तो शासन में मंगलवार को बैठक आयोजित की गई।
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बैठक में शहरी विकास सचिव, अपर सचिव, नगर निगम से एमएनए आशोक कुमार और कंपनी से सिद्घार्थ जैन ने शिरकत की। वहीं एक बैठक इस संबंध में शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार और मेयर विनोद चमोली के बीच भी हुई। दोनों ही बैठक में निर्णय लिया गया है कि योजना को बंद नहीं किया जाएगा।

इसके लिए सभी पक्षों को सकारात्मक रुख अपनाते हुए कार्रवाई करनी होगी। मंत्री ने निर्देश दिए कि कंपनी और नगर निगम प्रशासन दो दिन में एक साझा प्रस्ताव तैयार करे।

 प्रस्ताव इस तरह से बनाया जाएगा कि उसमें न तो कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़े और न ही निगम पर भार बड़े। प्रस्ताव तैयार करने के बाद उसे शासन में रखा जाएगा। जिस पर शासन ही सहमति देगा।

क्या है अभी तक टिपिंग फीस

दो साल पहले कंपनी और नगर निगम के बीच जो एमओयू हस्ताक्षर हुए थे। उसके तहत कंपनी को ठोस अपशिष्ट रिसाइकलिंग व प्रोसेसिंग से अतिरिक्त आय होना था। लेकिन अभी तक प्लांट तैयार नहीं हो पाया है। जिस कारण कंपनी को कूड़ा उठान से घाटा होने लगा।


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डीवीवीएम पहले से ही निगम द्वारा तय रेट का विरोध करता रहा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्घार्थ जैन ने बताया अभी हमें 350 रुपए प्रति क्वींटल भुगतान किया जा रहा है। जिससे कंपनी हर माह लाखों रुपयों का नुकसान उठा रही है।

दो साल से हम यह सोच कर घाटा उठाते रहे कि रिसाइकलिंग प्लांट बन जाने से घाटे को पाटा जाएगा। लेकिन अभी उसमें समय लगना है। घाटे से उबरने के लिए हमने 525 रुपए प्रति क्वींटल की दर तय की है।

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