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राम मंदिर के पास नहीं बन सकती मस्जिद: स्वरूपानंद

Tue, 19 May 2015 08:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 19 May 2015 08:19 AM IST
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shankaracharya said, there will be no mosque in ayodhya.

दो पीठों के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के पास कोई मस्जिद अब नहीं बन सकती। वहां गिराया गया ढांचा मस्जिद नहीं था। साईं पूजा को उन्होंने फिर सनातन धर्म के विरुद्ध बताया।

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उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वे नकली शंकराचार्यों का बहिष्कार करें। उन्होंने हिंदुओं का दृष्टिकोण समझने वाला नया फिल्म सेंसर बोर्ड बनाने का भी सुझाव दिया। रास्ते में जाम के कारण देर शाम हरिद्वार पहुंचे शंकराचार्य अपने कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
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शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या में तोड़ा गया ढांचा मस्जिद नहीं था, अत: मस्जिद निर्माण का सवाल उठाना गलत है। अयोध्या से बाहर कहीं भी मस्जिद बनाई जा सकती है। नए मंदिर का निर्माण सनातन धर्म की पद्धति के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत सी फिल्मों से हिंदू समाज आहत हुआ है। एक ऐसा सेंसर बोर्ड बनना चाहिए, जो प्रत्येक फिल्म को हिंदुओं को दृष्टि से देखकर पारित करे।

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ताजमहल भी हो सकता है हिंदू मंदिर, बताई वजह

shankaracharya said, there will be no mosque in ayodhya.

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि ताजमहल भी पहले हिंदू मंदिर हो सकता है। इस बारे में तथ्य जुटाए जाने चाहिए। वास्तव में ताजमहल की बनावट अपनी कहानी स्वयं कह रही है। जिस प्रकार तीन मंजिल नीचे कब्रें बनाईं गईं हैं, वैसा अन्य कोई उदाहरण भी नहीं मिलता।

कब्रें जमीन पर बनाई जाती हैं, तीन मंजिल नीचे जमीन के भीतर नहीं। संभव है किसी हिंदू मंदिर को हटाकर कब्र बनाई गई हो। उन्होंने आशंका जताई कि मुस्लिम शासक देश में ऐसा और भी जगह कर सकते हैं। मक्का में शिव मंदिर होने के सवाल पर शंकराचार्य ने गोलमोल जवाब दिया। कहा कि न्यायालय में वाद दायर होना चाहिए।

गीता-रामायण जैसे धर्म ग्रंथों को पढ़ाए जाने का समर्थन करते हुए उन्होंने एक बार फिर साईं पूजा का विरोध किया। कहा कि हिंदुओं को साईं मंदिरों में कदापि नहीं जाना चाहिए। जो ऐसा कर रहे हैं, वे सनातन धर्म के खिलाफ आचरण कर रहे हैं। उन्होंने गोहत्या बंद कराने की मांग भारत सरकार से की।

उन्होंने कहा कि हाल के भूकंप से साबित हो गया है कि टिहरी बांध मानवता के लिए खतरा है। गंगा, अलकनंदा आदि पवित्र नदियों पर अब और कोई नया बांध नहीं बनना चाहिए।

जाम ने नहीं होने दिया व्यापक अभिनंदन

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हरिद्वार के साधु-संत शंकराचार्य के अभिनंदन के लिए ज्वालापुर तिराहे पर एकत्रित हुए पर जाम के कारण शंकराचार्य सीधे कनखल स्थित मठ पहुंच गए। संत समाज ने मठ जाकर उनका अभिनंदन किया।

हरिद्वार में होगा विशाल सम्मेलन
शंकराचार्य स्वरूपानंद 22 मई को हरिद्वार से बदरीनाथ के लिए प्रस्थान करेंगे। रास्ते में कई जगह रुकते हुए वे 28 मई को बदरीनाथ पहुंचेंगे। 30 मई को शंकराचार्य का आगमन जोशीमठ में होगा। एक जून को शंकराचार्य हरिद्वार वापस लौट आएंगे।

छह और सात जून को पंतद्वीप पर दो दिवसीय विशाल सम्मेलन का आयोजन शंकराचार्य द्वारा किया गया है। इसको ‘प्रभु कृपा दुख निवारण सम्मेलन’ नाम दिया गया है। माना जा रहा है कि सम्मेलन को धर्म संसद की तर्ज पर आयोजित किया जाएगा।

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