देश के 84 शंकराचार्य अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत, जानिए क्यों
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देशभर के 84 शंकराचार्यों को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बहिष्कृत कर दिया है। ऐसे में अब उन्हें किसी भी अखाड़े में रहने के लिए जगह नहीं मिलेगी। जानिए अखाड़ा परिषद ने ऐसा फैसला क्यों लिया।
हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि देश में 84 फर्जी शंकराचार्य हैं। अखाड़ा परिषद और संत समाज इनमें से किसी के साथ भी संबंध न रखे।
केवल चार पीठें अधिकृत हैं और उन पर तीन शंकराचार्य विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि एक साल में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। अपने कार्यकर्ताओं से गाय कटवाने वाली कांग्रेस कुछ ही समय में इतिहास बन जाएगी।
नरेंद्र गिरी बुधवार को यहां जयराम आश्रम में षड़दर्शन साधु समाज, दंडी स्वामियों और अखाड़ा परिषद के संतों के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने इस बात पर आक्रोश जताया कि जब फर्जी शंकराचार्य अथवा जगद्गुरु बनते हैं, तब आश्रमों के संत अखाड़ा परिषद के निर्णयों का सम्मान नहीं करते। अच्युतानंद के कार्यक्रम में जाने के विरुद्ध अखाड़ा परिषद ने सीधा निर्देश दिया था।
इसके बावजूद कुछ संत वहां गए। उन्होंने कहा कि इस समय स्वरूपानंद सरस्वती, निश्छलानंद एवं भारती तीर्थ ही चार पीठों के शंकराचार्य हैं। अन्य सभी संत तो हैं, किंतु जगद्गुरु अथवा शंकराचार्य नहीं। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि योगी आदित्यनाथ आज ही अयोध्या पहुंच गए हैं और एक ही वर्ष में राम लला के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
संतों की चुप्पी है खतरनाक
मंदिर के कार्य को रोकने की ताकत किसी में नहीं है। राम मंदिर के लिए यदि प्राणों का उत्सर्ग भी करना पड़ा तो संत समाज पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा केरल में सार्वजनिक रूप से गाय काटने की भर्त्सना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस गौहत्या बंदी का समर्थन करे अथवा तबाह हो जाए। इसी तरह कांग्रेस गऊ कटवाती रही तो आने वाले दिनों में पार्टी इतिहास में बदल जाएगी।
श्री महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि राष्ट्र विरोधी कार्यों पर संतों की चुप्पी खतरनाक है। जब भी अखाड़ा परिषद कोई बयान जारी करे तब तमाम संत समाज को अगले ही दिन उसके समर्थन में जगह जगह आवाज उठानी चाहिए।
संतों की चुप्पी खुद संतों के लिए बहुत घातक हो रही है। संत चुप रहे तो बेशक प्रदूषण से गंगा बच जाए किंतु संत समाज नहीं बच पाएगा। उन्होंने कहा कि अनेक अखाड़ों से जुड़े महामंडलेश्वर विवादास्पद कार्यों में लिप्त हैं।
कुछ फर्जी संत भी बने बैठे हैं। इन सभी के खिलाफ पहली आवाज अखाड़ों को ही उठानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि गंगा की दुर्दशा शीघ्र समाप्त होगी। इस कार्य के लिए गंगा तटीय क्षेत्रों में सभी तीर्थों पर लगातार सम्मेलन होने चाहिए।