दलितों के धर्मपरिवर्तन से शंकराचार्य नाराज, निशाने पर बौद्ध धर्म
- दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने के विरोध में आए शंकराचार्य
- दलितों ने बौद्घ धर्म अपनाकर स्वयं का नुकसान किया
- शंकराचार्य बोले बौद्घ धर्म में शूद्र और सवर्ण में असमानता
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने को गलत बताया है। कहा कि डॉ. भीम राव अंबेडकर की इच्छा थी कि दलितों को सवर्णों के बराबर अधिकार मिलना चाहिए यह तभी हो सकता है जब वह सनातन धर्म में होते, लेकिन दलितों ने बौद्घ धर्म को अपनाकर स्वयं का बड़ा ही नुकसान किया है। क्योंकि बौद्घ धर्म में भी सभी वर्ग बराबर नहीं है। वहां पर शूद्र और सवर्ण में असमानता है।
उन्होंने अब बौद्घ धर्म को अपनाकर सीमित कर दिया। समानता तभी आ सकती है, जब सभी एक साथ गंगा स्नान करें, आरती करें, होली-दीवाली मनाएं।
शनिवार को बैरागी कैंप में लगाए गए शिविर में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि दलित समाज हिंदुओं के साथ गैर बराबरी महसूस करते हुए बौद्घ धर्म में बराबरी के लिए शामिल हो रहा है, लेकिन बौद्घ धर्म में भी शूद्र के लिए बराबरी नहीं है।
'नाम के पीछे जाति और गोत्र लिखना बंद करें हिंदू'
उन्होंने कहा कि जिस समय पटना में एक लाख दलित और आदिवासी लोगों ने बौद्घ धर्म को अपनाया था, उन्होंने बौद्घ धर्म के ग्रंथों का अध्ययन किया। बुद्घ ने कहा है कि शूद्र जाति का व्यक्ति कभी बड़ी जातियों की बराबरी नहीं कर सकता है।
इससे दलितों को वहां पर बराबरी नहीं मिल रही है। ऐसे में उन्हें सभी के साथ सनातन धर्म के त्यौहारों को मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में सभी जातियों के लोग भगवान के भक्त हैं। यहां पर जातियां बदलने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि सभी लोग जातपात की पीछे भाग रहे हैं। हर कोई अपने नाम के पीछे अपनी जाति या गोत्र लिखते हैं। यह गलत परंपरा पड़ी हुई है। इसको समाप्त करना होगा। सबको अपने नाम के पीछे जात की बजाय हिंदू लिखना चाहिए।
'साईं के चरणों में गंगा-यमुना तो क्यों आते है गंगा नहाने'
शंकराचार्य ने साईं पर एक बार फिर हमला बोला। उन्होंने कहा कि साईं भक्त कहते है कि गंगा यमुना साईं के चरणों में है। यदि साईं के चरणों में गंगा यमुना है तो वह साईं की पूजा करने वाले मोक्षदायिनी गंगा में स्नान करने क्यों आते है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि साईं से पहले भगवान शब्द का प्रयोग कतई न करें।
गंगा को बहने दें अविरल
शंकराचार्य ने कहा कि गंगा की सफाई के लिए 20 साल की जरूरत नहीं है। यदि इसी तरह से बांध और शहरों के सीवरेज आदि को डालते रहे तो 50 साल में भी गंगा साफ होने वाली नहीं है। यदि गंगा पर बने बांधों को हटा दिया जाए और धारा को अविरल बहने दे तो एक साल में गंगा साफ हो जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह उत्तराखंड के चारधामों की यात्रा करें।
नहीं चाहते लोग की महिलाएं जाएं मंदिर
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में महिलाओं को गीले सूती या रेशमी कपड़े पहनकर ही गर्भगृह स्थित शिवलिंग की पूजा करने की शर्त और शिंगणापुर मंदिर में शनि के चबूतरे पर महिलाओं के प्रवेश पर अनुमति मिलने पर शंकराचार्य ने कहा कि अदालत के सामने घुटने टेकने के बाद नई प्रथा थोपना साबित करता है कि लोगों की मंशा महिलाओं को मंदिर के अंदर न जाने देने की है।