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तीन सौ करोड़ के एसटीपी बनाए, सिस्टम नहीं

Mon, 24 Apr 2017 03:19 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 24 Apr 2017 03:19 PM IST
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sewerage treatment plan of jal sansthan
- फोटो : demo pic

एडीबी और पेयजल निगम ने शहर में तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर तैयार कर दिए हैं, लेकिन जलसंस्थान इनके रख-रखाव और संचालन से हाथ खड़े कर रहा है।

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जलसंस्थान का कहना है कि इसे ठेके पर दिया जाएगा, उसके पास स्टाफ नहीं है। वहीं, पेयजल मंत्री प्रकाश पंत कह रहे हैं कि इसे जलसंस्थान ही चलाएगा। ऐसे में यह पूरी योजना ही अनिश्चितता में फंस गई है।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट न होने से शहर की गंदगी नदी-नालों में जा रही है। लोगों को इससे दिक्कत है ही, पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। एडीबी और पेयजल निगम ने इन्हें तैयार तो कर दिया है, लेकिन विभागों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से यह परियोजना गर्त में जाने के आसार पैदा हो गए हैं। एडीबी और पेयजल निगम यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उनने एसटीपी बना दिए हैं, अब जलसंस्थान जाने। जलसंस्थान का रोना है स्टाफ नहीं है। ऐसे में अभी तक यह तय ही नहीं हो पाया है कि एसटीपी का रख-रखाव आखिर कौन करेगा?
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एडीबी और पेयजल निगम की ओर से 6 महीने पहले शहर में पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर दिए गए हैं। शहर भर में सीवर लाइन बिछा दी गई है। इससे पहले शहर में सीवरेज सिस्टम ही नहीं रहा। इस सिस्टम के चालू होने के बाद गंदगी  नदी, नालों में नहीं गिरेगी वहीं सीवर का पानी भी ट्रीटमेंट के बाद साफ होकर निकलेगा, जिसे इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। एसटीपी के रख-रखाव के लिए विभाग के पास स्टाफ ही नहीं है।

अधिकारियों का कहना है कि तरीका यह है कि सिस्टम तैयार होने से पहले अलग से सीवर डिवीजन खोली जानी चाहिए। जल संस्थान के अभियंता अभी सिर्फ चोक लाइन खोलने का काम देख रहे हैं। लेकिन अब पूरे प्लांट की देखरेख, मरम्मत, नई लाइनों की जिम्मेदारी है। जल संस्थान का कहना है कि व्यवस्था ठेके पर दी जाएगी।

ये है एसटीपी की स्थिति
एडीबी का तैयार किया सिस्टम
कारगी- 68 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
लागत- 105 करोड़
सीवर लाइनों का खर्च- 70 करोड़ 

पेयजल निगम का तैयार किया सिस्टम
मोथरोवाला- 20 एमएलडी
विजय कॉलोनी- .72 एमएलडी
जाखन- .5 एमएलडी
सालावाला- 1 एमएलडी
इन सबकी कुल लागत- 34 करोड़
सीवर लाइनों का खर्च- 150 करोड़

कारगी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर जल संस्थान को हैंड ओवर कर दिया गया है। अब यह कैसे चलेगा इसकी जिम्मेदारी उन्हीं की है। एडीबी की ओर से शहर में सीवर योजनाओं के काम पूरे कर लिए गए हैं।
- विनय कुमार मिश्रा, परियोजना प्रबंधक, एडीबी

पेयजल निगम की ओर से चारों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर अंतिम चरण का काम किया जा रहा है। इसके पश्चात इंदिरानगर में भी एक एसटीपी बनाया जाएगा। सभी को एक साथ जल संस्थान को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
- सुजीत कुमार विकास, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम

जल संस्थान के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट चलाने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। ऐसे में यह व्यवस्था ठेके पर दिए जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि ऊपर से विभाग के अभियंताओं की पूरी मॉनिटरिंग रहेगी।
- एसके गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान

नदी-नालों में गंदगी छोड़ने को लेकर कई बार एनजीटी की ओर से भी फटकार लगाई जा चुकी है। ऐसे में सीवर सिस्टम का तैयार होना अच्छी बात है लेकिन इसके संचालन के बारे में भला कौन सोचेगा।
- मंजू जैन, समाजिक कार्यकर्ता

अक्सर ही लोग सीवर भराव की समस्या से परेशान रहते हैं। पुरानी लाइन लीकेज करती है। उससे मुक्ति मिल सकेगी। यह तो अच्छी बात है लेकिन ऐसा न हो कहीं स्टाफ न होने से सिस्टम का संचालन ही न हो सके।

- रमा गोयल, सामाजिक कार्यकर्ता

सीवर सिस्टम के संचालन की व्यवस्था तो जल संस्थान को ही देखनी होगी। अब वो ठेके पर इसको देंगे या अपने ही स्टाफ से  इसे कराएंगे। यह सब उन पर छोड़ दिया गया है।
- प्रकाश पंत, पेयजल मंत्री

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