उत्तराखंड में जल्द पहुंचेगी सातवें वेतन के भत्तों की रिपोर्ट, जानिए कब
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प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में संशोधित भत्तों की रिपोर्ट शासन को अगले महीने तक मिल जाएगी। भत्तों के निर्धारण के लिए गठित वेतन समिति को केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए फैसले के बाद अब इसके कार्यालय ज्ञाप का इंतजार है। समिति की रिपोर्ट मिलते ही शासन पर संशोधित भत्ते देने का दबाव भी बढ़ जाएगा।
बता दें कि प्रदेश सरकार राजकीय कर्मचारियों को सातवें वेतन का लाभ दे चुकी है। यह लाभ उसने वेतन समिति की सिफारिशों पर ही दिया था। भत्तों के निर्धारण भी वेतन समिति को ही करना है। समिति अपने स्तर पर होम वर्क पूरा चुकी है।
मगर उसकी रिपोर्ट केंद्र के फैसले पर टिकी थी। केंद्र के स्तर पर भत्तों के निर्धारण के संबंध में गठित समिति ने केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंप दी थी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भत्तों का एलान कर दिया। अब समिति को कैबिनेट के फैसले का कार्यालय ज्ञाप जारी होने का इंतजार है।
कार्यालय ज्ञाप जारी होने के बाद वेतन समिति इसका तुलनात्मक अध्ययन कर भत्तों के निर्धारण की रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट अगले महीने शासन को सौंपी जा सकती है।
क्या कहते हैं अधिकारी और संगठन अधिकारी, जानिए
वेतन समिति के अध्यक्ष इंदु कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के बाद अब हमें कार्यालय ज्ञाप का इंतजार है। कार्यालय ज्ञाप का अध्ययन करने के बाद कमेटी रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट संभवत: अगले महीने शासन को सौंप दी जाएगी।
सचिव वित्त अमित सिंह नेगी का कहना है कि वेतन समिति की रिपोर्ट आने के बाद शासन उपलब्ध संसाधनों के आधार पर भत्तों का निर्धारण करेगा।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश प्रवक्ता अरूण पांडेय कहते हैं कि सातवें वेतन के भत्तों में अब कोई हीलाहवाली नहीं होनी चाहिए। समिति शासन को रिपोर्ट सौंपती है। लेकिन वित्त विभाग रिपोर्ट के परीक्षण व आर्थिक स्थिति की समीक्षा के नाम पर लंबा समय लेता है। वेतन समिति को तत्काल रिपोर्ट शासन को सौंपनी चाहिए। शासन कार्मिकों के लंबित एरियर का शीघ्र भुगतान करे।
उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि वेतन समिति सचिवालय भत्ता मूल वेतन का कम से कम 20 प्रतिशत पर निर्धारित करे। सचिवालय भत्ता दूसरे विभागों के फील्ड कर्मियों को अनुमन्य न हो। चालक, चतुर्थ श्रेणी कर्मी वाहन चालकों के भत्तों में समानता हो और उन्हें मूल वेतन का 25 प्रतिशत के हिसाब से भत्ता देय हो। समिति शासन को शीघ्र रिपोर्ट सौंपे।