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Dehradun News: दून अस्पताल से अल्ट्रासाउंड के लिए रेफर हो रहे गंभीर मरीज

Fri, 27 Oct 2023 12:27 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 27 Oct 2023 12:27 AM IST
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Serious patients being referred for ultrasound from Doon Hospital
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IIइमरजेंसी में गर्भवती महिलाओं का भी नहीं हो पा रहा अल्ट्रासाउंड
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Iअन्य मरीजों को भी भेजा जा रहा निजी सेंटर
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I दून अस्पताल में अल्ट्रासाउंड वाले मरीजों को खासी दिक्कत हो रही है। इमरजेंसी से अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। दरअसल, अस्पताल की इमरजेंसी में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट ना होने की वजह से मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। इमरजेंसी से गर्भवती महिलाओं समेत अन्य मरीजों को रेफर किया जा रहा है। मरीज चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर जा रहे हैं। दून अस्पताल का इससे अनुबंध है।
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Iराजधानी के दून मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ओपीडी के भूतल पर एएनसी (एंटीनेटल केयर टेस्ट) के तहत गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। पहले तल पर ओपीडी के अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में इमरजेंसी मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते थे, लेकिन वहां के रेडियोलॉजिस्ट के छुट्टी पर जाने की वजह से इमरजेंसी के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं।
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Iओपीडी में संभव नहीं इमरजेंसी के अल्ट्रासाउंड
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Iएएनसी में रोजाना करीब 40 से 50 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। वहीं, प्रथम तल पर 50 से 70 अन्य मरीजों के रोजाना अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। एएनसी अल्ट्रासाउंड में इतनी भीड़ रहती है कि वहां पर इमरजेंसी वाली गर्भवती महिलाओं को लेना संभव नहीं होता है। इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है तो उसे दोपहर दो बजे तक प्रथम तल पर अन्य मरीजों के साथ लिया जाता है। हालांकि, यहां पर 70 से अधिक मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो सकते हैं।
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Iखाली पद होने के बाद भी नहीं आ रहे रेडियोलॉजिस्ट
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Iअस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 200 से 300 मरीज आते हैं। मरीजों को अगर अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है तो इन्हें चंदन डायग्नोस्टिक भेजा जाता है। चंदन डायग्नोस्टिक से दून अस्पताल में अनुबंध है। अल्ट्रासाउंड के मरीज वहां भेजे जाते हैं। गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में उनको निजी सेंटर भेजना ठीक नहीं है। बता दें कि निजी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की सैलरी लाखों में होती है, लेकिन सरकारी अस्पताल में इनकी सैलरी कम होती है। इसीलिए यहां पर पद खाली होने पर भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं आ रहे हैं।
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Iकेस 1
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Iसहस्त्रधारा निवासी गर्भवती खुशबू को ब्लीडिंग की समस्या शुरू हो गई तो परिजनों ने उसे दून अस्पताल में भर्ती करवाया। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की स्थिति ठीक नहीं है। अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में खुशबू को निजी सेंटर भेजकर अल्ट्रासाउंड करवाया गया।
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Iकेस 2
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Iबल्लूपुर चौक निवासी युवक पित्त की थैली में पथरी की समस्या लेकर दून अस्पताल में भर्ती हुआ था। युवक के पेट में असहनीय दर्द था। शाम के समय अस्पताल में अल्ट्रासाउंड होना संभव नहीं था। ऐसे में युवक को निजी सेंटर भेजकर अल्ट्रासाउंड करवाया गया।

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Iअस्पताल में अल्ट्रासाउंड की समस्या है। इमरजेंसी के अल्ट्रासाउंड करने वाली डॉक्टर छुट्टी पर हैं। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटर भेजा जा रहा है। हालांकि, जल्द ही स्थिति सुधर जाएगी। - डॉ. अनुराग अग्रवाल, एमएस, दून अस्पतालI
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