Self Tax System: नगर पालिका-पंचायतों में स्वकर प्रणाली जल्द, शहरी विकास निदेशालय तैयार कर रहा प्रस्ताव
नगर पालिका-पंचायतों में स्वकर प्रणाली लागू होने पर लोग कारपेट एरिया और क्षेत्रवार तय दरों के आधार पर अपने भवन कर का निर्धारण स्वयं कर सकेंगे। इसके लागू होने के बाद पालिका-पंचायतों का राजस्व कई गुना बढ़ जाएगा। अपर निदेशक अशोक पांडे ने बताया कि इसका प्रस्ताव जल्द तैयार हो जाएगा।
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उत्तराखंड में नगर निगमों के बाद जल्द नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में भी स्वकर (सेल्फ असेसमेंट) प्रणाली लागू होने जा रही है। शहरी विकास निदेशालय इसका प्रस्ताव तैयार कर रहा है। कैबिनेट से इस पर मुहर लगने के बाद यह व्यवस्था लागू होगी।
प्रदेश में करीब 47 नगर पालिका और इतनी ही नगर पंचायत हैं। इन सभी में अभी तक यूनिट आधारित टैक्स प्रणाली लागू है। इसके तहत लोग अपनी प्रॉपर्टी के आकार के हिसाब से टैक्स का भुगतान करते हैं। नगर पालिका-पंचायतों में स्वकर प्रणाली लागू होने से लोग तय दरों पर भवन के आकार के अनुसार मूल्यांकन कर हाउस टैक्स जमा कर सकेंगे। इसके लागू होने के बाद पालिका-पंचायतों का राजस्व कई गुना बढ़ जाएगा। अपर निदेशक अशोक पांडे ने बताया कि इसका प्रस्ताव जल्द तैयार हो जाएगा।
ऐसी होगी स्वकर प्रणाली
नगर पालिका-पंचायतों में स्वकर प्रणाली लागू होने पर लोग कारपेट एरिया और क्षेत्रवार तय दरों के आधार पर अपने भवन कर का निर्धारण स्वयं कर सकेंगे। नगर निगमों में स्वकर निर्धारण को 12 मीटर से कम, 12 से 24 मीटर और 24 मीटर से अधिक चौड़ाई की सड़क के मानक के आधार पर भवनों की तीन श्रेणियां आरसीसी-आरबी, अन्य पक्का व कच्चा भवन निर्धारित हैं। इसके हिसाब से क्षेत्र विशेष यानी मोहल्लों के लिए कारपेट एरिया का रेट तय होता है। फिर कारपेट रेट और क्षेत्र की दरों के आधार पर लोग स्वकर का स्वयं निर्धारण करते हैं।
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दो साल पहले हुई थी कवायद
सचिव प्रभारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रदेश की नगर पालिका और नगर पंचायतों में स्वकर प्रणाली को लेकर पूर्व की त्रिवेंद्र सरकार में दो साल पहले कवायद शुरू हुई थी। इस पर अध्यादेश लाने की तैयारी भी हुई थी। इसी क्रम में निदेशालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है।