हिमालय में सूख रहे जलस्रोतों के रहस्य से उठेगा पर्दा
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राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक हिमालय के गंगा बेसिन क्षेत्र में झरने, झीलों और नदियों के स्रोत सूखने के कारणों की पड़ताल करेंगे।
भविष्य में जल की उपलब्धता कैसी रहेगी, इसका भी आकलन किया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से दिए गए ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग हिमालयन इकोसिस्टम’ (एनएमएसएचई) प्रोजेक्ट के तहत यह अध्ययन किया जाना है।
उल्लेखनीय है कि हिमालय के गंगा बेसिन क्षेत्र में जलस्रोत सूखने या उनमें पानी कम होने की बात सामने आ रही है। भविष्य
में यह बड़ी समस्या बन सकती है। इसे देखते हुए भारत सरकार ने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत ग्लेशियर व
बर्फबारी पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है, इसका भी अध्ययन होगा।
पता लगाएंगे कि हिमालय में जल की उपलब्धता क्या है?
वैज्ञानिक इस बात का पता लगाएंगे कि हिमालय में जल की उपलब्धता क्या है? यदि यह घट रही है तो भविष्य में नदियों पर इसका क्या असर होगा?
इसके अलावा जो जलस्रोत सूखे हैं या जिनमें पानी कम हुआ है, उनमें पानी की उपलब्धता कहां से थी और किन वजहों से पानी स्रोतों तक नहीं पहुंच रहा है। यदि जलवायु परिवर्तन इसका कारण है तो भविष्य में इसके क्या दुष्परिणाम होंगे। इसकी पड़ताल भी होगी।
‘एनएमएसएचई प्रोजेक्ट चार साल का प्रोजेक्ट है। इसके 11 सब प्रोजेक्ट हैं, जिन पर अध्ययन शुरू हुआ है। गंगोत्री से ऋषिकेश तक गंगा बेसिन के इलाके का अध्ययन किया जाना है। हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के चलते वर्तमान और भविष्य में जल की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा।’
- प्रो. राजदेव सिंह (निदेशक, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान-रुड़की)