चंद्रमा पर तालाब की तलाश में जुटे वैज्ञानिक
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने इसरो के प्रोजेक्ट पर शोध करते हुए चांद की सतह पर नमी के रूप में पानी के चिह्न होने की पुष्टि कर ली है।
अब चांद पर उल्कापिंडों के गिरने से बने गड्ढों में पानी की तलाश की जा रही है। आगामी चंद्रयान मिशन के तहत ऐसी जगहों पर निगरानी लैब स्थापित करने में यह मददगार साबित होगी।
यह खोजबीन चंद्रयान-1 से मिली इमेजों के विश्लेषण के आधार पर हो रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चांद पर अक्टूबर, 2008 में मानव रहित चंद्रयान-1 भेजा था जो वहां 30 अगस्त 2009 तक सक्रिय रहा।
इसका मकसद वहां पानी की तलाश करना था और अब आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक पीके गर्ग, आरडी गर्ग एवं दीपक सिंह भी इसरो की ओर से दिए गए प्रोजेक्ट के तहत इसी खोज में जुटे हैं।
चांद पर पानी के चिन्ह मौजूद
पहले चरण में यह साबित कर लिया गया है कि चांद पर पानी के चिन्ह मौजूद हैं। अब पियरी क्रेटर तथा शैकलेटन नामक उन गड्ढों में पानी की तलाश की जा रही है जो चांद की सतह पर उल्कापिंडों के गिरने के कारण बने हैं।
बढ़ती जा रही उम्मीद इसके लिए नासा द्वारा भेजी गई सेटेलाइट एल.आर.ओ में लगे लेजर सेंसर की मदद ली जा रही है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इससे यह पता लग सकेगा कि 8261 मीटर गहरे पियरी क्रेटर में पानी या बर्फ की कितनी मात्रा होगी। जैसे-जैसे शोध आगे बढ़ रहा है, चांद पर पानी मिलने की संभावना प्रबल होती जा रही है।