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Uttarakhand: प्रदेश में होगी सीबकथोर्न की खेती, किसानों की आर्थिकी सुधारेगा, बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना

Mon, 05 Jan 2026 11:02 AM IST
रेनू सकलानी भूपेंद्र राणा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 05 Jan 2026 11:02 AM IST
सार

सीबकथोर्न हिमालयी क्षेत्रों के किसानों की आर्थिकी सुधारेगा। प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना बना रही है। पिथौरागढ़ जिले के दारमा व व्यास घाटी में सीबकथोर्न को बढ़ावा दिया जा रहा।

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Seabuckthorn cultivation to begin in Uttarakhand will improve farmers economic condition in Himalayan region
सीबकथोर्न - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय गुणों से भरपूर सीबकथोर्न फल का उत्पादन किसानों की आर्थिकी को मजबूत करेगा। प्रदेश सरकार सीबकथोर्न के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना बना रही है। पिथौरागढ़ जिले के दारमा व व्यास घाटी में वन विभाग ने सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की पहल की है।

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सीबकथोर्न औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही पर्यावरणीय दृष्टि से बहुत उपयोगी वृक्ष है। इसकी जड़ें भूमि कटाव रोकने में बहुत सक्षम हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेतीली भूमि होने के कारण भूमि का अत्यधिक कटाव होता है। व्यास घाटी के गरव्यांग गांव में सीबकथोर्न फल सबसे अधिक उत्पादित होगा। बाजार में सीबकथोर्न फल व जूस की मांग को देखते हुए प्रदेश सरकार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रही है। सीबकथोर्न समुद्रतल से तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर उत्पादित होता है।

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राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वित्तीय सहायता से वन विभाग ने पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड की दारमा, व्यास, चौदास में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन अभी तक प्रदेश में इसका उत्पादन काफी कम है। जबकि चीन सीबकथोर्न का सबसे बड़ा उत्पादक है।

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कई बीमारियों में सीबकथोर्न का इस्तेमाल

खांसी, एलर्जी, त्वचा रोग व आंख के रोगों में सीबकथोर्न का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, ए, ई, के, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6 व बी-12, कैरोटिनाइड, एंटीऑक्सीडेंट, रेशे, मैलिक, एसिड, लाइकोपीन, पाल्मीटिक एसिड, एमीनो एसिड, प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। फलों के साथ पत्तियों को औषधीय व न्यूट्रास्यूटिकल उपयोग में लाया जाता है। इनका उपयोग कैंसर, गुर्दे की बीमारियां, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, एलर्जी, हृदय टोनिक में किया जाता है।

बाजार में 500 रुपये तक बिक रहा सीबकथोर्न फल का जूस

औषधीय गुण के कारण सीबकथोर्न फल की बाजार में काफी मांग है। इसके फल से तैयार जूस 500 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। सरकार का कहना है कि इसकी खेती से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

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पर्वतीय जिलों में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि (रीप) योजना के तहत कार्य योजना बनाई जा रही है। पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कहां-कहां सीबकथोर्न का उत्पादन किया जा रहा है। इसके लिए योजना बना कर स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा।- धीराज गर्ब्याल, सचिव ग्राम्य विकास विभाग

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