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आखिर क्यों लोग हुए भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के 'फैन', वीडियो में देखें...

Mon, 30 May 2016 01:14 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 30 May 2016 01:14 PM IST
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Scientific Advisor R Chidambaram down to earth
Scientific Advisor R Chidambaram down to earth - फोटो : file photo

भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. आर चिदंबरम बेहद सरल स्वभाव के हैं। रविवार को वह उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्र में बनाए गए फोल्डिंग पु‌ल के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे।

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वर्तमान में चिदंबरम भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहाकार के पद पर कार्यरत हैं। संघिय सरकार की कैबिनेट  में वैज्ञानिक सलाहाकर अध्यक्ष हैं। राजगोपाल चिदंबरम पद्मविभूषण से सम्मानित वैज्ञानिक हैं। उन्होंने संघनित पदार्थ भौतिकी और नाभिकीय भौतिकी के क्षेत्र में शोध कार्य किया है।
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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हिमालयन एनवायरमेंटल स्टेडीज एंड कंजरवेशन आर्गनाइजेशन (हेस्को) के सहयोग से अमर उजाला फाउंडेशन स्टील के आठ फोल्डिंग पैदल पुल तैयार करवाएं है, जिनका उद्घाटन करने के लिए डॉ. आर चिदंबरम रविवार को उत्तरकाशी पहुंचे।
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इससे पहले वह रास्ते में एक छोटे से ढाबे में चिदंबरम ने चाय-नाश्ता किया। जहां वह बेहद सरल तरीके से लोगों के मिले और बातचीत करते नजर आए। इतना ही नहीं चाय नाश्ते का बिल (315 रुपए) भी उन्होंने आयोजकों को देने नहीं ‌दिया। उनके साथ पदृमश्री डॉ. अनिल जोशी भी थे। उनके इस व्यवहार से स्‍थानीय लोग डॉ. आर चिदंबरम के मुरीद हो गए।

इन्होंने शोध और विकास के लिए ऑटोमोटिव सेक्टर में शिक्षैक संस्‍थानों से संपर्क बढ़ाने के लिए कोर सलाहाकार समूह का गठन किया। गांवों में तकनीक पहुंचाने के लिए रूरल टेक्नोलॉजी एक्‍शन ग्रुप को बनाया। चिदंबरम ने नेशलन नॉलेज नेटवर्क सेटअप करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जिससे भारत के पंद्रह सौ शैक्षिक और शोध संस्थानों को जोड़ा गया है। उन्होंने सुसंगल एनर्जी की जरूरत पर जोर दिया।

वीडियो में देखें कितने सरल है चिदंबरम...

Scientific Advisor R Chidambaram down to earth
Scientific Advisor R Chidambaram down to earth - फोटो : amar ujala

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें...

आपदा प्रभावित क्षेत्र उत्तरकाशी में हल्के और कम लागत के इन आठ पुलों को विशेष रूप से डिजाइन करवाया गया है। बांदलवैली, देहरादून में भी एक पुल बनकर तैयार हो चुका है। 

हेस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने बताया कि करीब 40 लाख रुपए लागत से बनाए जा रहे स्टील के इन आठ विशेष पुलों के निर्माण का खर्च अमर उजाला फाउंडेशन ने वहन किया है। तकनीकी विशेषज्ञता और निर्माण का कार्य हेस्को के निर्देशन में हो रहा है।

यह पुल ज्यादातर ऐसे स्थानों पर लगाए जा रहे हैं, जहां आपदा के दौरान पुल बह गए हैं। वैज्ञानिकों की ओर से डिजाइन किए गए इन पुलों का वजन अन्य पुलों की तुलना में काफी कम है। स्टार्ट अप के तौर पर युवाओं की एक टीम इन पुलों को तैयार कर रही है। प्रत्येक पुल को डेढ़ मीटर के अलग-अलग पैनल से जोड़कर बनाया गया है। प्रत्येक पैनल का वजन 15 से 45 किलो और पूरे पुल का वजन 170 से 180 किलो है।

यह पूरी तरह अस्थाई पुल है, जिसे नट और बोल्ट की सहायता से जोड़ा जा सकता है। आपदा की स्थिति में पुल को खोलकर हटाया भी जा सकता है। यह पुल काफी अधिक भार सहने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि इसे जोड़ने में आठ से 16 घंटे का वक्त लगता है। इसकी लागत अन्य पुलों की तुलना में खासी कम है। डॉ. जोशी ने कहाकि राज्य सरकार इस तकनीकी से बनाए गए पुलों को पहाड़ी के क्षेत्रों में स्थापित करवाकर पहाड़वासियों का जीवन सुगम बना सकती है।

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