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स्कूल बंद होने के बाद यहां लगती है नशेड़ियों की 'क्लास'
चंद्रमोहन शुक्ला/अमर उजाला, कोटद्वार
Updated Sat, 16 Nov 2013 04:32 PM IST
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उत्तराखंड के कोटद्वार में भाबर के कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जहां छुट्टी के बाद नशेड़ियों का राज कायम हो जाता है। आसपास के असामाजिक तत्वों का यहां जमावड़ा हो जाता है। देर शाम तक यहां महफिल सजती है। सुबह स्कूल खुलते ही बच्चों को पहले शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक के गिलास और सिगरेट के खाली पैकेट उठाने पड़ते हैं।
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देर रात सजती है महफिल
बात घमण्डपुर प्राइमरी स्कूल से ही शुरू करते हैं। यहां देर रात तक महफिल सजती है। यहां तैनात शिक्षिकाओं से बात करने पर वे सबसे पहले यही दिक्कत बताते हैं। सुबह आते ही हर रोज परिसर में दर्जनों प्लास्टिक के गिलास, खाली शराब की बोतलों से सामना होता है। ये नशेड़ी विद्यालय में सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। आए दिन पेयजल टंकी की टोंटी टूटी रहती हैं। कई बार शिक्षक अपने पैसे से टोंटी लगा चुकी हैं।
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शराबियों का आतंक
अपना नाम न छापने की शर्त पर लोग बताते हैं कि निंबूचौड़ से मवाकोट, नंदपुर से मोटाढाक तक के पूरे इलाके में शाम ढलते ही शराबियों का आतंक हो जाता है। पुलिस कभी इधर झांकने तक नहीं आती। असामाजिक तत्व सड़कों, पुलों और चौराहों पर खुलेआम शराब की बोतल खोलकर बैठ जाते हैं।
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यह हाल केवल अकेले मोटाढाक, दुर्गापुरी, घमंडपुर या फिर निंबूचौड़ का नहीं है, मालन नदी, हल्दूखाता, किशनपुरी, कलालघाटी, झंडीचौड़ से लेकर सिगड्डी तक के सरकारी स्कूलों का है। जशोधरपुर और सिगड्डी सिडकुल क्षेत्र में भी लोग शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस से शिकायत करने पर उल्टे उनसे ही सवाल जबाव किए जाते हैं।