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स्कूल में छात्राओं के बेहोश का सिलसिला बना 'रहस्य'
अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Thu, 26 Sep 2013 09:28 AM IST
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चमोली जिले के जीआईसी नैनीसैंण में छात्राओं का चिल्लाने और बेहोश होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हाल ही में 12 छात्राओं के इकठ्ठे बेहोश हो जाने के बादफिर से 4 छात्राएं बुधवार को बहोश हो गई।
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बुधवार को कक्षा 12 की चार छात्राओं की तबियत खराब हो गई, उन्हें अन्य छात्राओं की मदद से घर भिजवाया गया। घटना से स्कूल में तनाव का महौल व्याप्त है।
पिछले हफ्ते से शुरु हुआ सिलसिला
लगातार इस तरह के मामले सामने आने से स्कूल प्रबंधन काफी परेशान हैं। हालांकि सीएचसी कर्णप्रयाग के चिकित्सक प्रकाश भट्ट इस स्थिति को हारमोंस परिवर्तन का लक्षण और कुछ छात्राओं में खून की कमी बता रहे हैं।
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बीते बृहस्पतिवार से विद्यालय में कक्षा 10,11 और 12 की छात्राएं बेहोश हो रही हैं। मंगलवार को स्थिति सामान्य रहने पर स्कूल प्रबंधन ने कुछ राहत की सांस ली थी लेकिन बुधवार की सुबह करीब 9.45 बजे पहले वादन में ही कक्षा 12 की चार छात्राएं चिल्लाने लगी और कुछ देर बाद बेहोश हो गई।
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स्थिति सामान्य होने पर भेजा घर
अन्य छात्राओं की मदद से उन्हें प्रधानाचार्य कार्यालय में लाया गया। थोड़ी देर की कोशिशों के बाद कुछ स्थिति सामान्य होने पर प्रधानाचार्य ने उन्हें घर भिजवा दिया।
पीटीए अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कंडवाल का कहना है कि विद्यालय में यह पहला मौका है, जब इस तरह छात्राओं की तबियत खराब हो रही है। किमोली गांव के राकेश नेगी ने बताते हैं कि कई बार घरों में भी छात्राओं की तबियत खराब हो रही है।
इनका कहना है
स्थानीय परिवेश के चलते भी छात्राओं की इस ढंग से तबियत बिगड़ सकती है। घर, परिवार का माहौल भी इसके लिए काफी हद तक निर्भर करता है।
- अजरा परवीन, असिस्टेंट प्रो. मनोविज्ञान, पीजी कॉलेज हल्द्वानी
कुछ छात्राओं की पहले वादन में तबियत खराब हुई। उन्हें अन्य छात्राओं और स्टाफ की मदद से घर भेज दिया गया। बाद में स्थिति सामान्य रही। इस समस्या से पूरा विद्यालय परिवार मानसिक तनाव में है।
- डीएस नेगी, प्रधानाचार्य, जीआईसी नैनीसैंण