फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   School children Help will be taken in cleanliness of Ganga

गंगा स्वच्छता में हाथ बंटाएंगे बच्चे: उत्तराखंड, यूपी, बिहार सहित इन राज्यों के स्कूली बच्चों की ली जाएगा मदद

Mon, 08 Aug 2022 03:40 PM IST
रेनू सकलानी अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 08 Aug 2022 03:40 PM IST
सार

गंगा को साफ सुथरा बनाया जा सके, इसके लिए साल 2014 में शुरू किए गए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान के तहत 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करके सैकड़ों योजनाएं धरातल पर उतरी जा रही हैं। अब स्कूली बच्चों को न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी दी जा रही, वरन स्कूली बच्चों को गंगा नदी की जैव विविधता के बारीकियों से भी रूबरू कराया जा रहा है।

विज्ञापन
School children Help will be taken in cleanliness of Ganga
हरिद्वार गंगा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय नदी गंगा के संरक्षण और उसकी जैव विविधता को सुरक्षित करने को लेकर जहां केंद्र सरकार नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) जैसी योजनाएं संचालित कर रहा, वहीं राष्ट्रीय नदी को साफ सुथरा और निर्मल बनाया जा सके, इसके लिए उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों स्कूली बच्चों की भी मदद ली जा रही है।
विज्ञापन


भारतीय वन्यजीव संस्थान के नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा यूनिट की ओर से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गंगा नदी के किनारे स्थित स्कूली बच्चों को न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी दी जा रही, वरन स्कूली बच्चों को गंगा नदी की जैव विविधता के बारीकियों से भी रूबरू कराया जा रहा है।
विज्ञापन


संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक और नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा की नोडल अधिकारी डॉ. रुचि बडोला के मुताबिक, फिलहाल देश के 3,264 स्कूली बच्चों को गंगा की जैव विविधता के साथ ही गंगा नदी में पाई जाने वाली कई प्रजातियों के जलीय जंतुओं, पक्षियों के साथ गंगा नदी में पाई जाने वाली वनस्पतियों के बारे में भी जागरूक किया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

गंगा को साफ करने में खर्च हो रहे 20,000 करोड़ 

गंगा को साफ सुथरा बनाया जा सके, इसके लिए साल 2014 में शुरू किए गए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान के तहत 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करके सैकड़ों योजनाएं धरातल पर उतरी जा रही हैं। जहां उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, यूपी और पश्चिम बंगाल में गंगा के किनारे 265 घाट बनाए जा रहे और 92 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे, वहीं, नदी के किनारे 1,34,106 हेक्टेयर जमीन पर वनीकरण का काम कराया जा रहा है। वनीकरण का डीपीआर देहरादून स्थित फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की ओर से तैयार किया गया है।

गंगा नदी के जलीय जंतुओं को सुरक्षित करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान और सिफरी के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। इसके लिए देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान और सेंट्रल इंलैंड फिशरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिफरी) के
विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। वन्यजीव संस्थान के वन्यजीव विज्ञानियों की ओर से उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक जलीय जंतुओं के संरक्षण को लेकर शोध करने के साथ संरक्षण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही है।

ये भी पढ़ें...Dehradun: पूर्व आईएफएस किशनचंद सहित कई अधिकारियों पर मुकदमे की शासन ने दी अनुमति, इस खुलासे ने था चौंकाया

स्कूली बच्चों को गंगा नदी के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ ही गंगा की जैव विविधता के बारे में जागरूक किया जा सके, इसके लिए फिलहाल भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से 20 बड़ी कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया है। -डॉ. रुचि बडोला, नोडल अधिकारी, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed