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छात्रवृत्ति घोटाला : सत्यापन करने वाले राजपत्रित अधिकारियों पर लटकी तलवार  

Tue, 15 Jan 2019 10:12 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 15 Jan 2019 10:12 AM IST
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scholarship scam in uttarakhand Gazetted officers is in danger
अशोक कुमार - फोटो : AmarUjala

छात्रवृत्ति घोटाले में छात्रवृत्ति वितरण का सत्यापन करने वाले राजपत्रित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। निजी शिक्षण संस्थानाें में घोटाले की आशंकाओं के बीच सत्यापन में बरती गई लापरवाही उनकी भूमिका को संदिग्ध बनाती है। एसआईटी की जांच में छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलने लगी है। कई मुकदमों की नींव रखी जा चुकी है, अब सिर्फ अंतिम मोहर का इंतजार है। कानूनी जानकाराें की माने तो छात्रवृत्ति घोटाले में पहली गाज वितरण का सत्यापन करने वालाें पर गिरेगी। इसके बाद दूसरे अधिकारियाें की भूमिका तय होगी। 

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निजी शिक्षण संस्थानाें में सत्यापन कर छात्रवृत्ति वितरण को सुनिश्चित करने का जिम्मा सीधे तौर पर जिला समाज कल्याण विभाग पर है। शासन ने पारदर्शिता के इरादे से सत्यापन का अधिकार राजपत्रित अधिकारी को ही दिया था। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में 70 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार और 30 प्रतिशत राज्य सरकार  उपलब्ध कराती है। कई साल पहले छात्रवृत्ति घोटाले का शोर मचा तो शासन स्तर से निजी संस्थानाें में वितरित की गई छात्रवृत्ति का राजपत्रित अधिकारियों से सत्यापन कराया गया, लेकिन उसमें किसी तरह की जालसाजी उजागर नहीं हो सकी।
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एसआईटी जांच में जिस तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है। उससे बड़े घोटाले की आशंकाओं को हवा मिली है। सेवानिवृत्त डीजी राम सिंह मीणा का कहना है कि छात्रवृत्ति वितरण में किसी तरह की अनियमितताएं बरती गई है, यह तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन निसंदेह छात्रवृत्ति वितरण में सत्यापन अथवा पर्यवेक्षण की व्यवस्था है। यदि इस व्यवस्था में लापरवाही बरती गई है, तो संबंधित की जवाबदेही तय होगी।  
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छात्रवृत्ति घोटाले की एसआईटी जांच को गति मिली है। जल्द ही उसके परिणाम भी सामने आएंगे। छात्रवृत्ति दस्तावेज की जांच में आने वाले तथ्याें के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।  

- अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था

धोखाधड़ी के मामले में रकम वापस करने से आरोप कम नहीं होता है, लेकिन कानून में हुए नए संशोधन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 को समझौते योग्य बना दिया गया है। छात्रवृत्ति घोटाले में ऐसा संभव नहीं है, क्याेंकि इससे सीधे तौर पर सरकार जुड़ी है। ऐसे में आरोपियों से रकम वापस लेकर समझौतानामा फाइल करने का सवाल नहीं उठता है। यह संशोधन व्यक्तिगत रुप से शिकार हुए लोगाें पर मान्य है।
- आरएस राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता

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