एसीसी से पास आउट हुए 58 कैडेट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना में बतौर जवान भर्ती होने के बाद अफसर बनने के लिय चयनित जांबाज सैनिकों के आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) का 103 वां बैच शुक्रवार को पास आउट हुआ।
कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने बैच के 58 कैडेट को जेएनयू की ग्रेजुएशन डिग्री देकर सम्मानित किया। भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के एसीसी से तीन वर्ष की शैक्षणिक ट्रेनिंग के बाद अब यह कैडेट आईएमए में एक साल की प्री-कमीशन मिलिट्री ट्रेनिंग लेंगें।
कोर्स में नेपाल पोखरा के रहने वाले बेश बहादुर रोका ने ओवर आल मेरिट में टाप कर चीफ आफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल हासिल किया।
नया मुकाम हासिल किया
पर्सनल बिलो आफिसर्स रैंक (पीबीओआर) यानि बतौर सैनिक भर्ती होकर सेना के तीनों अंगों थल, वायु व नौसेना को अंतर सर्विस चयन प्रक्रिया और स्टाफ स्लेक्शन बोर्ड में सफल होने के बाद आर्मी कैडेट कॉलेज में स्नातक की डिग्री करवाई जाती है।
इसी के तहत आईएमए की पासिंग आउट परेड से पूर्व अकादमी के चैटवुड हाल में शुक्रवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से 29 विज्ञान और 29 आर्टस कैडेट को स्नातक डिग्री प्रदान की।
कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने कहा कि कठिन परिस्थितियों से जूझ कर इन युवाओं ने एसीसी से पास आउट होकर नया मुकाम हासिल किया है। उन्होंने कहा कि एसीसी से पासआउट कैडेट ने सैन्य इतिहास में परंपराओं को निर्वाह करते हुए अद्म्य साहस की कई मिसाल बनाई हैं। इससे पूर्व एसीसी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
जीवन में अनुशासन ने रोका को बनाया टॉपर
2/1 गोरखा के जवान से आर्मी कैडेट कॉलेज के 103 कोर्स के टापर बने नेपाल के बेश बहादुर रोका सफलता की एक मिसाल है। विपरीत हालात के बावजूद टाप करने के लिए वह जीवन में अनुशासन और लगन को कारण मानते हैं। नेपाल के पोखरा में रहने वाले रोका वहीं से स्कूल की शिक्षा लेने के बाद 2006 में गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हुए।
सेना में आने के बाद उन्हें अफसर बनने की आंतरिक प्रक्रिया का पता चला है और यह उनकी मेहनत का नतीजा है कि वह नए पाठ्यक्रम और परिवेश में आकर कोर्स के ओवरआल टापर बने। कैडेट रोका ने बताया कि भारतीय सेना में सैनिक बनना उनके लिए एक उपलब्धि से कम नहीं था।
पिता शोबित रोका लंबे समय से दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं, जबकि वह पोखरा में मां केसाथ रहते थे। नेपाल में भारतीय सेना में जाने का युवाओं में खासा उत्साह है।
पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन सेना में भर्ती होने का मौका मिला तो उन्होंने उसे गंवाया नहीं। रोका ने कोर्स के दौरान न केवल स्नातक कोर्स बल्कि सर्विस विषय में जोरदार प्रदर्शन किया, जिसकी बदौलत उन्हें चीफ आफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल के साथ कमांडेंट सिल्वर मेडल मिला है।
मेडल धारक
चीफ आफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल - बेश बहादुर रोका (नेपाल)
चीफ आफ आर्मी स्टाफ सिल्वर मेडल - विदेशी पोलाई (उड़ीसा)
चीफ आफ आर्मी स्टाफ ब्रांज मेडल - संजय सिंह जम्बाल (ऊधमसिंह नगर)
कमांडेंट सिल्वर मेडल
सर्विस विषय में प्रथम - बेश बहादुर रोका (नेपाल)
बीए में प्रथम - प्रदीप कुमार (हिमाचल प्रदेश)
बीएससी में प्रथम - संजय सिंह जम्बाल (ऊधमसिंह नगर)
कमांडेंट बैनर- कारगिल कंपनी