उत्तराखंडः हद है हुजूर, शिक्षकों को दिखाया मजदूर
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उत्तराखंड कृषि विभाग में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। मामला करीब दो साल पहले का है। हद यह रही कि चकराता ब्लॉक में विभाग की ओर से राष्ट्रीय जलागम योजना के तहत कराए गए कार्यों में शिक्षकों को मजदूर दिखा दिया गया।
इसके अलावा मस्टरोल (किए गए काम में दैनिक श्रमिकों के कार्य, समय और उनकी संख्या को दर्शाना) में भी गड़बड़ी सामने आई है। मस्टरोल में जिन मजदूरों के नाम शामिल हैं, उनमें से अधिकतर गांव में रहते ही नहीं। चकराता निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष जोशी की शिकायत पर वर्ष 2013 में एसडीएम चकराता की जांच में अधिकतर शिकायतें सही पाई गईं।
इसके बावजूद प्रकरण में दोषियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब यह खुलासा दून निवासी की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है। दून निवासी ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट आरटीआई में मांगी थी। अब उन्होंने इस मामले में कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
शिकायत पर दो साल पहले जांच के बाद से मामला फाइलों में
आरटीआई कार्यकर्ता और ग्राम सीडी पोस्ट बरौथा चकराता निवासी सुभाष जोशी ने वर्ष 2013 में प्रकरण में शिकायत की थी। शिकायत पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी चकराता ने जांच कर पाया कि अधिकतर शिकायतें सही हैं।
जांच में एसडीएम चकराता ने कहा कि मस्टरोल में कार्य कराने के लिए जिन मजदूरों के नाम इसमें दर्ज हैं। इनमें कुछ शिक्षक और शिक्षा मित्र हैं। वहीं, इसमें अधिकतर ऐसे लोग भी हैं जो गांव में रहते ही नहीं।
जांच में भूमि कटाव रोकने के लिए तारजाल एवं सेब के रेड चीफ किस्म के पौधों के वितरण में भी अनियमितता सामने आई थी। इसके बावजूद पिछले दो साल से मामला जिला प्रशासन और कृषि विभाग की फाइलों से बाहर नहीं आया।
यह प्रकरण मेरे समय का नहीं है। मामले में संबंधित सहायक कृषि अधिकारी को न्याय पंचायत से हटा दिया गया गया था। इसके अलावा कोई और कार्रवाई नहीं हुई।
- ज्योति एस कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून
कृषि विभाग में हुए फर्जीवाड़े
- करीब पांच करोड़ का ढैंचा बीज घोटाला। इसमें बीज आए बगैर दिखाया था वितरण।
- अरहर बीज घोटाला, खराब बीज का किया वितरण।
- भीमल के पौधे लगाए बगैर इन्हें लगा दर्शाए जाने का मामला।
- मुख्य कृषि अधिकारी की अनुमति के बगैर लाखों रुपये निकालने का मामला।