IMA: CBI जांच में शक में आया एक कर्नल
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भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून में फर्जी दस्तावेजों से भर्तियों के खुलासे के बाद अब सीबीआई के हाथ अकादमी में ठेकों के आवंटन में होने वाले गोलमाल के सबूत लगे हैं। जांच एजेंसी को पता चला है कि छोटे निर्माण सहित अन्य ठेकों के आवंटन में लाखों रुपये का लेनदेन हुआ।
इस मामले में अकादमी में तैनात रहे कर्नल (क्यू) के बैंक खातों में ठेकेदारों से लेनदेन के सबूत जांच एजेंसी को मिले हैं। मामले में कुछ ठेकेदार और आईएमए की संबंधित ब्रांच के कुछ अन्य अधिकारी भी निशाने पर हैं। सीबीआई देहरादून ने मामले में प्रारंभिक जांच दर्ज कर ली है।
अकादमी में होने वाले माइनर वर्क्स एंड रिपेयर के अलावा परिसर में स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के ठेकों और आवंटन का अधिकार कर्नल (क्यू) के पास होता है। सीबीआई ने कुछ माह पूर्व एक पुख्ता सूचना पर प्रकरण की जांच शुरू की, जिसमें एक ठेके के आवंटन से संबंधित लेनदेन का रिकार्ड एजेंसी के हाथ लगा। मामला तब मजबूत हुआ जब कर्नल के निजी बैंक खातों में कुछ बड़े मनी ट्रांजेक्शन के सबूत मिले।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार आरोपी कर्नल के खाते में कई बार लेनदेन हुआ है। लाखों रुपये की राशि उनके अकाउंट में ट्रांसफर हुई है। अभी कुछ मरम्मत निर्माण और व्यावसायिक प्रतिष्ठान आवंटन के मामलों में सबूत मिले हैं। जिसके बाद एजेंसी ने आईएमए से बीते तीन वर्षों के टेंडर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को निजी लोगों को ठेके आवंटन करने से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
सैन्य मुख्यालय से जांच के लिए मांगी अनुमति
सैन्य अकादमी की राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिष्ठा के हिसाब से बेहद संवेदनशील होने के चलते मामले में आगे की पूछताछ, जांच के लिए सीबीआई ने सैन्य मुख्यालय से अनुमति मांगी है। प्रारंभिक जांच में सीबीआई के पास कई पुख्ता दस्तावेज लगे हैं, जिन्हें आधार बनाकर सैन्य मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया। बताया गया कि आरोपी कर्नल अकादमी से सेना की पूर्वी कमान में स्थानांतरित हो चुका है, उस तक पहुंचने के लिए अनुमति अनिवार्य है।
एक साल में भ्रष्टाचार का चौथा मामला
अकादमी में भ्रष्टाचार को लेकर तीन एफआईआर एक साल में दर्ज हो चुकी हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर समूह ग और घ के पदों पर कई भर्तियों के मामले में सीबीआई ने जनवरी 2014 में दो एफआईआर दर्ज की थी। फर्जीवाड़े में तीन सैन्य अफसरों सहित दो दर्जन अन्य आरोपी हैं।
इसके बाद भर्तियों के नाम पर पैसों के लेनदेन का एक मामला अप्रैल 2014 में दर्ज किया गया, जिसमें एक सिविल कर्मचारी की गिरफ्तारी भी की गई। अब ठेकों के आवंटन में लेनदेन का मामला सीबीआई की पकड़ में आया है। हालांकि, मामले में अभी एफआईआर नहीं हुई है, सिर्फ प्रारंभिक जांच चल रही है।