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'मिनी बैंक' के खातों में बड़े घोटाले का खुलासा

Wed, 20 Aug 2014 02:50 AM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 20 Aug 2014 02:50 AM IST
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scam in cooperative bank

हरिद्वार के सहकारिता विभाग में 43 लाख 88 हजार 625 रुपए के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। मामला खुला तो दो अधिकारियों ने करीब 32 लाख 88 हजार 276 रुपये समिति के खाते में जमा करा दिए लेकिन 11 लाख रुपये की रिकवरी अभी तक नहीं हो पाई है। रिकवरी करने के बजाए सहकारिता विभाग ने अब फिर से जांच बैठा दी।

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29 जनवरी 2014 को किसान सेवा सहकारी समिति के प्रबंध निदेशक राजेंद्र सिंह सैनी ने जिला सहायक निबंधक को पत्र भेजा था कि समिति के मिनी बैंक के खातों में एक सितंबर 2011 से पहले वित्तीय गबन पाया गया है।
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उन्होंने कहा कि यहां पर पहले बैलेंस बुक नहीं बनती थी। अब जबकि बैलेंस बुक बनवाई गई तो खातों में 43 लाख 88 हजार 625 रुपये का अंतर आया पाया।

11 लाख का अभी तक कोई हिसाब नहीं

scam in cooperative bank

मामला सामने आने के बाद गबन की गई रकम में से 32 लाख 88 हजार 276 रुपये जमा करा दिए गए लेकिन तत्कालीन प्रबंध निदेशक और मिनी बैंक प्रभारी ने 11 लाख 349 रुपये और इनका ब्याज अभी तक जमा नहीं कराया है।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों के स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ लोगों ने मामले की शिकायत डीएम से की। डीएम के आदेश पर अप्रैल 2014 में एसडीएम हरिद्वार ने मामले की जांच की। एसडीएम ने जांच में घपले की पुष्टि की।

28 जुलाई 2014 को सोहलपुर सिकरोढ़ा निवासी धूलीराम ने सहकारी समिति के निबंधक को शिकायती पत्र भेजकर गबन की राशि की ब्याज सहित रिकवरी किए जाने की मांग की गई है जिस पर सहकारिता विभाग ने एक बार फिर से जांच बैठा दी, जबकि पहले ही पूरी जांच हो चुकी है।

क्या कहते हैं जांच अध‌िकारी?

scam in cooperative bank

किसान सेवा सहकारी समिति कोटा मुरादनगर में गबन की जांच की गई। समिति के तत्कालीन प्रबंध निदेशक विजयपाल सिंह और मिनी बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार की ओर से बाकी राशि तो जमा करा दी गई लेकिन 11 लाख 349 रुपये और इनका ब्याज अभी तक जमा नहीं कराया गया। प्रमोद कुमार को निलंबित भी किया गया था और अब उनकी मृत्यु हो चुकी है। जांच में सामने आया कि विभाग की ओर से प्रबंध निदेशक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
-बीर सिंह बुद्धियाल, एसडीएम हरिद्वार, जांच अधिकारी।

इस मामले में पहले एसडीएम हरिद्वार की ओर से जांच की गई है। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। अब फिर से बाकी राशि और ब्याज जमा नहीं किए जाने की शिकायत धूलीराम की ओर से की गई है। जिसकी जांच एडीओ बहादराबाद नरेंद्र चौहान को सौंपी गई है।
-मान सिंह सैनी, जिला सहायक निबंधक, सहकारिता।

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