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सावन 2019: महादेव ने इसी मंदिर में चंद्रमा को श्रापमुक्त कर मस्तक पर किया था धारण

Sun, 21 Jul 2019 09:01 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal जितेंद्र सिंह सजवाण, अमर उजाला, ऋषिकेश
जितेंद्र सिंह सजवाण, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 21 Jul 2019 09:01 AM IST
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Sawan 2019 lord shiva mysterious temple in rishikesh
प्रतीकात्मक

चंद्रभागा में गंगा तट के नजदीक बना श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। कहा जाता है कि यहां चंद्रमा को श्राप से मुक्ति मिली थी और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर विराजित किया था।

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श्रावण मास सहित शिवरात्रि और अन्य दिनों में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। मंदिर के पंडित आचार्य भवानी दत्त ने बताया कि स्कंद पुराण में श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर का जिक्र कौमुद तीर्थ के नाम से आता है।
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कथाओं के अनुसार श्राप से मुक्ति पाने के लिए भटकते हुए चंद्रमा यहां गंगा तट के समीप पहुंचा और भगवान शिव की आराधना शुरू की।

करीब दस हजार वर्ष तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न हुए और दर्शन दिए। इसके बाद भगवान शिव ने चंद्रमा को श्राप मुक्त कर अपने मस्तक पर विराजित किया। इस  मंदिर के विषय में उत्तराखंड पर्यटन विभाग में भी देखने को मिलता है।

काफी गहराई में है शिवालय 

श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवालय जमीन से काफी गहराई में है। पंडित भवानी दत्त बताते हैं कि काफी पहले बाबा गणेश गिरि  शिवालय की पूजा करते थे।

लेकिन चातुर्मास में गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण शिवालय की पूजा नहीं हो पाती थी। इस पर उन्होंने शिवालय को मायाकुंड स्थित अपने आश्रम में ले जाने का निर्णय लिया और शिवालय के चारों ओर खुदाई शुरू कर दी।

फिर हुआ चमत्कार

कहते हैं कि बाबा गणेश गिरि हर रोज जितना खोदते, सुबह तक शिवालय उतना जमीन के भीतर चला जाता। करीब हफ्ते भर यह सिलसिला चला।

एक रात बाबा गणेश गिरि को स्वप्न आया कि मंदिर को वहीं रहने दिया जाए अन्यथा शिवालय रसातल में लुप्त हो जाएगा। सुबह स्वप्न पर विचार कर वहीं शिवालय में पूजा शुरू की गई। तभी यह क्रम जारी है।

स्वामी विवेकानंद ने की चंद्रेश्वर मंदिर में तपस्या

कहा जाता है कि सन् 1890 में स्वामी विवेकानंद ने भी कुछ माह इस मंदिर में तपस्या की। मंदिर में लगी एक फोटो में स्वामी विवेकानंद मंदिर में बनी एक गुफा में साधना में बैठे हुए दिखाई देते हैं।  

जूना अखाड़ा के अंतर्गत होता है मंदिर का संचालन 
इस मंदिर का संचालन श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा कनखल, हरिद्वार के तहत होता है। इसके प्रबंधक सचिव महंत वासुदेव गिरी और महंत रविंद्र पुरी हैं। व्यवस्थापक दिगंबर अखिलेश भारती हैं।

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