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कड़ी मेहनत से दूसरों के लिए बनी मिसाल

Sat, 18 Jan 2014 12:01 PM IST
नरेश थपलियाल/मुनीश रियाल, अमर उजाला देहरादून
नरेश थपलियाल/मुनीश रियाल, अमर उजाला देहरादून Updated Sat, 18 Jan 2014 12:01 PM IST
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save girls child story

कोटद्वार में अपर कालाबाड़ निवासी शीला सुयाल क्षेत्रीय महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं।

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महिलाओं को जोड़ रही स्वरोजगार से
पारिवारिक परिस्थितियों और कड़ी मेहनत ने उन्हें साधारण घरेलू महिला से खास बना दिया है। परेशानी की घड़ी में जिस काम ने उन्हें सहारा दिया वे उसी काम को और महिलाओं को भी सिखा कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।

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11 साल पहले शीला एक आम गृहिणी थी, 12 साल की बेटी और सात साल का बेटा था। पति दवाइयों की कंपनी में सेल्स मैनेजर थे। एक दिन अचानक पति हर्षवर्द्धन सुयाल के सिर में तेज दर्द उठा और ब्रेन हैमरेज से उनकी मृत्यु हो गई।
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पति की अकस्मात मृत्यु से शीला के खुशहाल परिवार पर मानों पहाड़ टूट पड़ा। पति की प्राइवेट नौकरी के कारण उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक सहायता भी नहीं मिली।

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उन्होंने एक साल तक घर में बचे हुए रुपयों से घर चलाया, मगर अन्य आर्थिक स्रोत नहीं होने के कारण उनकी पारिवारिक परेशानियां बढ़ती चली गई।

गनीमत रही कि उन्होंने शादी से पहले सिलाई कड़ाई से आईटीआई की थी। उन्होंने आखिरकार सिलाई कड़ाई को ही अपनी आजीविका बनाने की ठानी।

शुरुआत में उन्होंने बची हुई पूंजी से ही सिलाई शुरू की मगर, ना तो कोई कपड़े सिलाने आया और ना ही सीखने। इस वजह से उनकी आर्थिक स्थित और भी खराब हो गई।

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उन्होनें हिम्मत नहीं हारी और भाई की मदद से वर्ष 2003 में बालासौड़ रोड पर दुकान खोली। रात दिन के कठिन परिश्रम के बाद उन्होंने अपने कार्य को आगे बढ़ाया। वर्तमान में स्थिति यह है कि उनके पास स्थानीय महिलाएं और लड़कियां सिलाई सीखने आती हैं।

वे खुद भी महिलाओं की सूट सिलाई का काम करती हैं। अब तक वे लगभग 300 महिलाओं, लड़कियों को सिलाई कढ़ाई सिखाकर स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं।

उनकी कड़ी मेहनत के कारण आज उनकी बिटिया ऑफिस मैनेजमेंट से पॉलीटेक्निक करने के बाद सीएमओ आफिस में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात है। बेटा बीएससी कर रहा है। क्षेत्र की महिलाएं उनसे प्रेरित होकर सिलाई को अपना रोजगार का माध्यम बना रही हैं।


पिता की उम्मीदें रोशन कर रहीं बेटियां
उत्तराखंड रोडवेज में ड्राइवर सुरेंद्र सिंह के बेटा नहीं है। तीन बेटियां हैं। पत्नी गुजर गई। तीनों बेटियां ही उनके लिए बेटे सरीखी हैं। तीनों बेटियों ने भी उपलब्धियों का आकाश चूमने की ठानी है।  

मुजफ्फरनगर जिले के बुढोढ़ी गांव थाना छपार निवासी निवासी सुरेंद्र सिंह हरिद्वार जिले में तैनात हैं। लड़के नहीं होने पर उन्हें ताने भी सुनने पड़ते लेकिन उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। तीनों बेटियों को बेटे की तरह पाला। दस साल पहले पत्नी के देहांत होने के बाद उन्होंने बेटियों को पिता के साथ ही मां का प्यार भी दिया।

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उनकी बड़ी बेटी हिमानी चौधरी एमबीए करके आईएएस की तैयारी कर रही है। हिमानी का कहना है कि पिता ने जो विश्वास हम पर किया है, उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगी।

दूसरी बेटी शिवानी पीजी करने के साथ ही पीसीएस की तैयारी कर रही है। तीसरी बेटी कनिका बीसीए कर रही है। सभी बेटियों का सपना है कि पिता को कभी बेटा न होने की कसक न हो।

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