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'इसलाम में है बेटियों का अहम रोल'
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 15 Jan 2014 10:39 AM IST
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अमर उजाला की ‘बेटी ही बचाएगी’ पहल को मुसलिम समाज ने ‘लब्बैक (हाजिर हूं)’ कहा है।
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पैगंबर-ए-इसलाम के यौम-ए-पैदाइश के मौके पर मुसलिमों ने बेटियों की पढ़ाई-लिखाई के साथ बेहतरीन परवरिश का संकल्प लिया और शपथ पत्र भरे।
‘बेटियों’ को याद किया
उलेमा ने 1400 साल पहले रसूल पाक की बेटी बचाने की मुहिम लोगों को याद दिलाने के साथ इसलाम में अहम रोल निभाने वाली ‘बेटियों’ को भी याद किया।
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ईद मिलादुन्नबी के रवायती जुलूस के बाद जलसे में दून के नायब शहर काजी सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने अमर उजाला की बेटी ही बचाएगी पहल के समर्थन का ऐलान किया और लोगों को मुहिम की अहमियत बताई। उन्होंने पहले खुद शपथ भरा, भरा फिर लोगों से भरने की अपील की।
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बोले-‘मैं इस पहल को लब्बैक कहता हूं। समर्थन देता हूं।’ फिर मौके पर मौजूद महिलाओं, पुरुषों और मदरसा छात्रों ने शपथ पत्र भरे। उन्होंने कहा कि रसूल पाक सल्लल्लाहो अलैहवसल्लम ने बेटी बचाने, उनका हुकूक दिलाने का अभियान 1400 साल पहले शुरू किया था।
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इस मौके पर बेटियों के संबंध में रसूल पाक की हदीस का भी जिक्र किया गया। नायब शहर काजी कादरी ने कहा कि इसलाम में कई बेटियों का अहम रोल रहा है। जिनका जिक्र किए बिना इसलामिक इतिहास में अधूरापन सा नजर आएगा।
इतिहास से जुड़ीं और भी कई बेटियों का जिक्र
इस मौके पर उन्होंने रसूल पाक की बीवी उम्मुल मुसलमीन हजरत खदीजा, हजरत आयशा सिद्दीका, हजरत फातिमा रजिअल्लाहुताला अन्हा का जिक्र किया और उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर रोशनी डाली।
इस मौके पर हजरत अम्मारा का भी जिक्र किया गया जिन्होंने जंग-ए-बदर में तलवार उठाकर सरकार-ए-दो आलम की हिफाजत की थी। इसके साथ इसलामी इतिहास से जुड़ीं और भी कई बेटियों का जिक्र आया।
दो हजार से अधिक ने भरा शपथपत्र
अमर उजाला की बेटी ही बचाएगी की मुहिम के तहत मंगलवार को भी दो हजार से अधिक लोगों ने शपथ पत्र भरा। इस दौरान लोगों ने अमर उजाला की मुहिम की प्रशंसा की। कहा कि इससे समाज में बेटियों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
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लोगों ने अमर उजाला में बेटियों पर आधारित खबरों को सराहनीय और प्रेरणाप्रद बताया। कहा कि ऐसी खबरों से लोगों का बेटियों के प्रति नजरिया बदलता है।