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अब बेटियों के हवाले वतन साथियों...

Wed, 15 Jan 2014 10:22 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Jan 2014 10:22 AM IST
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save girl child story of shiwani and jyotsana

एक जमाने तक सेना में पुरुषों का वर्चस्व रहा है, लेकिन गुजरते वक्त के साथ अब लड़कियां भी उनसे कंधे से कंधा मिलकर कदमताल कर रही हैं।

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डेढ़ सौ बेटियों ने सेना का तमगा हासिल किया
जनसंख्या के लिहाज से उत्तराखंड भले ही छोटे पहाड़ी राज्यों में शुमार होता हो लेकिन यहां की बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। बीते पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो लगभग डेढ़ सौ बेटियों ने सेना का तमगा हासिल किया है।

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शहरों में जहां लोग इकलौती बेटी को घर से अकेले भेजने में डरते हैं वहीं पर्वतीय प्रदेश में ऐसे परिवार भी हैं जिन्होंने अपनी बेटियां सरहद के हवाले कर दीं।
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जिस पिता का सीना कभी बेटे को सेना में भेजकर शान से चौड़ा होता रहा है आज उसकी बेटी वर्दी पहन कर देश की आन-मान और शान बढ़ा रही है। यहां बेटियां वर्दी पहन कर भाइयों के लिए मिसाल बनी तो वे भी प्रेरित होकर सेना में शामिल हो गए।

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नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर ज्योत्सना नगरकोटी परिवार की इकलौती संतान हैं। पिता अनिल नगरकोटी जो खुद बिजनेसमैन हैं, चाहते थे कि वह सिविल सर्विसेज को अपना कॅरियर बनाए। ज्योत्सना सेना ज्वाइन करना चाहती थीं।

बनना चाहती थी सेना में अफसर
इकलौती बेटी होने के बावजूद माता पिता ने उसे प्रोत्साहित किया। 2007 में ज्योत्सना ने भारतीय नौसेना ज्वाइन किया। मां गुड्डी मलिका नगरकोटी ने बताया कि उनकी बेटी एमकाम है। दादा और नाना सेना में सेवाएं दे चुके हैं तो ज्योत्सना सेना में अफसर बनना चाहती थी।

पिता अनिल ने बताया कि हमने ज्योत्सना के लालन-पालन में बेटे-बेटी का फर्क नहीं रखा। हमारी इकलौती संतान अब सेना में अफसर है और शादी के बाद भी उसका परिवार बेटों से ज्यादा हमारा ख्याल रखता है। यही किसी भी मां-बाप की संतान से उम्मीद होती है।

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गढ़ी कैंट की शिवानी छेत्री भारतीय सेना में मेजर हैं। शिवानी ने 2001-02 में सेना ज्वाइन की है। उनके पिता नवराज छेत्री ओएनजीसी से प्रबंधक रिटायर हुए हैं। मेजर शिवानी ने एमकाम और सिम्बायसिस पुणे से एमबीए किया है।

कार्पोरेट सेक्टर के बदले उनकी इच्छा सेना में जाने की थी। पिता नवराज ने बताया कि शिवानी ने बड़े भाई कैप्टन (रि) सागर छेत्री की तरह एमकाम और एमबीए किया। वह सेना में जब चयनित हुईं तो अपने ही भाई के लिए प्रेरणा बनीं।


शिवानी के जाने के दो बरस बाद सागर ने सेना ज्वाइन कर लिया। सागर ने शार्ट सर्विस के बाद सेना छोड़ दी लेकिन शिवानी अब भी सेना में हैं। उत्तराखंड से बड़ी संख्या में लड़कियां सेना में सीमित संभावनाओं के बावजूद जा रही हैं।

एजुकेशन कोर में देहरादून की मेजर ऋचा शर्मा ने 2004 में जब ज्वाइन किया तो वह अपने बैच में उत्तराखंड से एकमात्र अभ्यर्थी थीं जो चयनित हुईं।

उत्तराखंड की बेटियां हैं सबसे आगे
सेना में सीमित पदों पर कमीशन मिलता है, लेकिन 1.1 करोड़ आबादी वाले उत्तराखंड की लड़कियां 20 करोड़ वाले यूपी, 4 करोड़ वाले हरियाणा और पंजाब को टक्कर दे रही हैं।

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उत्तराखंड की लड़कियों का नौसेना और वायुसेना में बतौर अफसर भर्ती होने का शानदार रिकॉर्ड रहा है। नौसेना में 2010 से 2012 तक सर्वाधिक हरियाणा से 19 महिला अफसर बनीं, जबकि यूपी से 18 और उत्तराखंड से 15 महिला अफसर चयनित हुईं।

इसी अवधि में एयरफोर्स में यूपी की 78 अफसर बनीं, हरियाणा से 50, पंजाब से 39, दिल्ली से 34 और उत्तराखंड से 29 लड़कियां फौज में अफसर बनीं। सेना में बीते तीन सालों में 35 महिला अफसर बनीं हैं।

महिला और पुरुष का अनुपात
- सेना 28.1 पुरुष अफसर के मुकाबले एक महिला अफसर है। कुल महिला अफसर 1289
- नौसेना में 26 पुरुष अफसरों के मुकाबले एक महिला अफसर है। कुल महिला अफसर 337
- एयरफोर्स में 7.9 पुरुष अफसरों के मुकाबले एक महिला अफसर है। कुल महिला अफसर 1334

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