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श्रवण कुमार से कम नहीं ये बेटी
सुपा सिंह बिष्ट/ अमर उजाला, साहिया(देहरादून)
Updated Wed, 22 Jan 2014 10:12 AM IST
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देहरादून जिले के साहिया की 25 वर्षीय ऋतिका सेठी की कहानी सतयुग के श्रवण कुमार से कम नहीं है।
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मां-बाप की सेवा को समर्पित
श्रवण कुमार ने जिस तरह अपना जीवन अंधे माता-पिता की सेवा में समर्पित किया था उसी तरह ऋतिका भी अपना जीवन लकवाग्र्रस्त मां-बाप की सेवा को समर्पित कर चुकी है।
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माता-पिता की देखभाल के लिए ऋतिका ने बैंक में अधिकारी बनने के सपने को त्याग दिया। अब शादी भी इस शर्त पर करने के लिए तैयार हुई है कि उसके बीमार माता-पिता उसी के साथ रहेंगे।
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ऋतिका के माता-पिता का कहना है कि ऋतिका किसी लड़के से कम नहीं है। एक बेटा जो मां-बाप के लिए करता है वह सब ऋतिका कर रही है। उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।
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साहिया में ठेकेदारी का काम करने वाले राकेश सेठी (60) और रेनू सेठी (58) की इकलौती संतान है ऋतिका। ऋतिका वर्ष 2006 में बीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी तभी राकेश सेठी को लकवे का अटैक पड़ा। इससे उनका आधा शरीर बेकार हो गया।
पिता को घर चलाने की चिंता हुई तो ऋतिका ने हिम्मत बंधाई और उनका सहारा बनने की ठान ली। ऋतिका की जिंदगी में दूसरा आघात 2010 में लगा। मां रेनू को कमर से नीचे तक के हिस्से में लकवा मार गया। पिता के बाद मां भी बिस्तर पर आ गई तो ऋतिका की उम्मीदें बिखर गईं।
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लेकिन उसने हार नहीं मानी। खुद को संभाला और करीब 22 साल की उम्र में मां-बाप की सेवा को ही सबकुछ मान लिया। इस वक्त ऋतिका कंप्यूटर कोर्स के साथ बैंकिंग की तैयारी कर रही थी।
मां-बाप को छोड़ने के लिए तैयार नहीं
करीब चार साल पहले राशन की दुकान खोलने के बाद से आज तक ऋतिका घर चलाने के साथ ही माता-पिता का इलाज करवा रही है। हालांकि, जवान होती बेटी को देख माता-पिता ने किसी तरह उसके लिए लड़का देख सगाई तो करा दी लेकिन ऋतिका मां-बाप को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
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ऋतिका का कहना है कि उसने शादी के लिए हां सिर्फ एक शर्त पर की है कि मा-बाप उसके साथ रहेंगे। बकौल ऋतिका जिन माता-पिता ने उसे बड़ा किया वह उनको एक पल में कैसे छोड़ सकती है।