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किसी की नहीं सुनी और बन गई 'चैंपियन'

Thu, 09 Jan 2014 11:25 AM IST
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Jan 2014 11:25 AM IST
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save girl child campaign in uttarkhand

देहरादून निवासी 83 वर्षीय खिलानंद भट्ट को अपनी बेटी किरण पर बेहद गर्व है।

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आगे बढ़ने का मौका मुहैया कराया
बेटों की ही तरह उन्होंने बेटी को भी आगे बढ़ने का मौका मुहैया कराया। यही वजह है कि एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में किरण ने झंडा गाड़ा। वह घर में भी उतना ही समय देती हैं।

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खिलानंद भट्ट की दो और बेटियां हैं, जिनमें से एक गुड़गांव में बिजनेस कर रही है, जबकि एक टीवी चैनल में कार्यरत है।

महज इंटर पास भट्ट ने अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाई। त्रिमूर्ति विहार, क्लेमेंटटाउन निवासी खिलानंद भट्ट गर्व से कहते हैं कि मेरी बेटी, मेरी शान है। वे अपनी स्वर्गीय पत्नी सुलोचना भट्ट के सहयोग को भी याद करते हैं।
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ऐसे लोगों से उन्हें खासी एलर्जी है, जो बेटियों को कमतर समझ उनके आगे बढ़ने की राह अवरुद्ध करते हैं। बकौल खिलानंद बेटी अच्छा कार्य कर रही है तो उसे रोकने का क्या तुक है? उन्हें समझना चाहिए कि बेटी ही नहीं होगी तो बेटा कहां से आएगा? समाज कैसे बचेगा? बेटी को वह रखवाले की संज्ञा देते हुए उसे बचाने की गुहार करते हैं।

विरोध से नहीं हारी किरण
मूल रूप से अंजनीसैण (टिहरी) की रहने वाली किरण ने एडवेंचर टूरिज्म में हाथ आजमाने की सोची तो विरोध करने वाले कम नहीं थे।

लोगों का कहना था कि राफ्टिंग, बीच कैंपिंग जैसा काम लड़कियों को करते देखा है भला? काम के दौरान लड़कों के बीच रात गुजारनी पड़ी तो? लेकिन किरण ने किसी की नहीं सुनी।

उनके कान में बस माता-पिता की आवाज गूंज रही थी, अपना दीपक खुद बनो। इस आवाज की ही ताकत थी कि हर विरोध, हिचक को दरकिनार करते हुए उन्होंने एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल किया। 14 साल हो गए हैं।

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इंडो गंगा हालिडेज की संचालक किरण को गर्व है कि जिस क्षेत्र को अमूमन पुरुषों का माना जाता है, उसमें दीपक बनने में उन्होंने कामयाबी हासिल की। बता दें कि किरण ऐसा करने वाली राज्य की पहली महिला हैं।

नौकरी छोड़ किया बिजनेस का रुख
किरण ने गाजियाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (आईएमएस) से एमबीए करने के बाद कुछ समय नौकरी भी की, लेकिन साहसिक पर्यटन में शुरू से ही रुचि होने के चलते इस क्षेत्र में अपना काम शुरू करने की ठानी।

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अंतत: कामयाब रहीं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल आउटफिटर्स की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं।

स्नो स्कीइंग की चैंपियन भी बनीं
किरण के नाम कई उपलब्धि हैं। वह इंडियन एसोसिएशन ऑफ राफ्टिंग आउट फिटर्स की सचिव रहीं। साथ ही स्नो स्कीइंग की नेशनल चैंपियन का खिताब भी उन्होंने हासिल किया।

कॉलेज में गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सेदारी तो की ही, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और राष्ट्रपति के हाथों बेस्ट कैडेट के लिए पुरस्कृत भी की गईं।

जन्म : पांच अक्तूबर
शिक्षा : एमए (अंग्रेजी) (एमकेपी पीजी कॉलेज, देहरादून), पीजी डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (गाजियाबाद), बेसिक कोर्स इन माउंटेनियरिंग (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग, उत्तरकाशी), बेसिक कोर्स इन स्कीइंग (औली)

यह मिले सम्मान
उत्तराखंड गौरव, विशिष्ट विभूति, साहसिक पर्यटन के लिए विशेष सम्मान, महिला सशक्तिकरण वर्ष सम्मान।

यह ट्रैक नापे
गौमुख से तपोवन, रूपकुंड ट्रैक, नंदा देवी ट्रैक, पांवलीकांठा ट्रैक, खतलिंग ग्लेशियर ट्रैक, वासु-की-ताल ट्रैक।

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