कांग्रेस ने उत्तराखंड में खोया अपना सबसे तेज सांसद
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15 वीं लोकसभा में राज्य के 5 सांसदों में सबसे मुखर सतपाल महाराज रहे हैं। सांसद प्रदीप टम्टा की सर्वाधिक 96 फीसदी उपस्थिति तो रही लेकिन पांच वर्ष में दो ही प्रश्न उनके खाते में हैं।
संसद में होने वाली बहस में महाराज देश भर के सांसदों में 14 वें स्थान पर हैं, जबकि राज्य के अन्य सांसद राष्ट्रीय औसत को भी नहीं छू पाए। संसद में प्रश्न उठाने में राज्य का कोई सांसद राष्ट्रीय औसत को नहीं छू पाया है।
लोकसभा में सांसदों की उपस्थिति का राष्ट्रीय औसत 76 फीसदी है, जबकि उत्तराखंड के सांसदों का औसत 79 फीसदी है। उपस्थिति में राज्य और राष्ट्रीय औसत से नीचे रहने वालों में नैनीताल सांसद केसी सिंह बाबा और टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह हैं।
राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहे हैं महाराज
संसद में होने वाली बहस में सांसदों की सक्रियता की 37.9 की राष्ट्रीय औसत से अधिक केवल सतपाल महाराज हैं। शेष सांसद उठने वाले मुद्दों पर राय तक नहीं रखते दिखे हैं।
महाराज की संसद में उपस्थिति भी राष्ट्रीय औसत से अधिक 86 फीसदी रही है और प्राइवेट बिल लाने में भी वह सबसे अग्रणी रहे हैं। सांसद टम्टा ने पांच वर्ष के दौरान महज दो प्रश्न ही संसद में पूछे हैं।
तारांकित प्रश्न पूछने में सांसद महाराज और बाबा के अलावा किसी अन्य सांसद का नंबर तक नहीं आया है। लोकसभा सांसदों की उपस्थिति, पूछे प्रश्न, बहस और प्राइवेट बिल को लेकर पीआरएस इंडिया वेबसाइट ने यह आंकड़े दर्शाए हैं। आगे की स्लाइड में देखिए उत्तराखंड के सांसदों का प्रदर्शन।
सांसद नैनीताल केसी सिंह बाबा का सदन में प्रदर्शन
उपस्थिति - 59 फीसदी
बहस में भाग लिया - 19
तारांकित प्रश्न - 9
अतारांकित प्रश्न - 245
प्राइवेट मेंबर बिल - 6
उठाये अहम मुद्दे
- -उत्तराखंड को स्पेशल एरिया गेम्स प्लान का हिस्सा बनाना
- -राज्य में रेल लाइनों को बिछाने
- -जिम कार्बेट नेशनल पार्क
- -उत्तराखंड के एतिहासिक धरोहरों का संरक्षण
- -पंतनगर हवाईअड्डे का विस्तारीकरण
सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह(13 अक्टूबर 2012 से)
उपस्थिति - 75 फीसदी
बहस में भाग लिया - 9
तारांकित प्रश्न - 0
अतारांकित प्रश्न - 31
प्राइवेट मेंबर बिल - 0
उठाये अहम मुद्दे
-टिहरी बांध विस्थापित
-नदियों में सिल्ट की समस्या
-राष्ट्रीय राजमार्गों का हाल
-डीएचडीसी में रोजगार
(आंकड़े: पीआरएस इंडिया.ओआरजी वेबसाइट के मुताबिक)
सांसद प्रदीप टम्टा पर एक नजर
उपस्थिति- 96 फीसदी
बहस में भाग लिया - 13
तारांकित प्रश्न - 0
अतारांकित प्रश्न - 2
प्राइवेट मेंबर बिल - 3
उठाये अहम मुद्दे
- -उत्तराखंड के सड़क संपर्क मार्ग
- -हिमालय राज्यों के विकास के लिए अलग बोर्ड का गठन
- -गंगा के अत्यधिक दोहन से पैदा हो रहा संकट
सांसद सतपाल महाराज का लेखा-जोखा
उपस्थिति - 86 फीसदी
बहस में भाग लिया - 155
तारांकित प्रश्न - 11
अतारांकित प्रश्न - 128
प्राइवेट मेंबर बिल - 9
उठाये अहम मुद्दे
- -राष्ट्रीय राजमार्र्गों की रिअलाइनमेंट
- -राज्य के लिए विशेष वित्तीय पैकेज
- -एयरपोर्ट, हेलीपेड, रेलवे और सड़कों में सुधार
- -जल विद्युत परियोजनाओं की एनओसी
- -सेना में भर्ती से लेकर कई सैन्य मसलों
- -राष्ट्रीय मसलों पर भी महाराज सक्रिय रहे
सांसद विजय बहुगुणा (23 जुलाई 2012 तक)
उपस्थिति- 80 फीसदी
बहस में भाग लिया- 13
तारांकित प्रश्न- 1
अतारांकित प्रश्न - 18
प्राइवेट मेंबर बिल - 0
उठाये मुद्दे
- -पर्वतीय राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों का हाल
- -हवाई पट्टियों का विस्तारीकरण
- -पर्वतीय राज्यों में बाढ़ नियंत्रण की स्थिति
- -चिकित्सा स्वास्थ्य से संबंधित योजनाओं की स्थिति
(आंकड़े: पीआरएस इंडिया.ओआरजी वेबसाइट के मुताबिक)
मंत्री होने के नाते रावत नहीं आते परिधि में
पीआरएस इंडिया वेबसाइट के मुताबिक सांसद हरीश रावत यूपीए सरकार में मंत्री होने के कारण उन्हें सरकार की और से कई बहस का हिस्सा खुद ब खुद बनना होता है।
ऐसे में मंत्रियों को सांसद की कारगुजारी से बाहर रखा गया है। मंत्रियों को संसद में उपस्थिति दर्ज करने के लिए रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं करने होते। मंत्री न तो प्रश्न पूछ सकते हैं और न हीं प्राइवेट बिल सदन में ला सकते हैं।