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चर्चित IFS संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखंड काडर, कभी बने थे केजरीवाल की पसंद

Mon, 29 Aug 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Aug 2016 10:47 PM IST
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sanjiv chaturvedi join uttarakhand cadre.
संजीव चतुर्वेदी

एम्स में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को लेकर चर्चित हुए भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड काडर ज्वाइन कर लिया है। सोमवार को उन्होंने सचिवालय जाकर ज्वाइनिंग की विधिवत औपचारिकताएं पूरी की।

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ठीक एक साल पहले वर्ष 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी संजीव को जान का खतरा देखते हुए उनका काडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड किया गया था। इसके पूर्व दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने एम्स में भ्रष्टाचार के दौ सौ मामलों में कार्रवाई की थी, जिसकी जद में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी आए थे।
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बतौर आईएफएस अधिकारी संजीव ने 2004 से 2012 तक हरियाणा में अपनी सेवाएं दी। इस दौरान उन्होंने फर्जी पौधारोपण, आरा मशीनों के लाइसेंस देने में अनियमितता, अवैध खनन समेत तमाम घपले-घोटालों का पर्दाफाश किया। इनमें सत्ता के करीबियों की संलिप्तता सामने आने पर उन्हें सरकार का कोपभाजन भी होना पड़ा।

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भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी जंग तो पीछे पड़ी सरकार

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sanjeev chaturvedi - फोटो : Getty Images

उन्हें न केवल निलंबित करके चार्जशीट दी गई, बल्कि कई मामलों में उनके विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की गईं। हरियाणा में नौकरी के दौरान उनके कुल 12 तबादले भी हुए। अपने साथ हो रहे उत्पीड़न पर संजीव ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई। उनके प्रकरणों की गहराई से छानबीन के बाद राष्ट्रपति ने एक-एक कर चार आदेश उनके पक्ष में दिए, जिससे न केवल सरकार को उन्हें बहाल करना पड़ा बल्कि चार्जशीट को भी रद हुई।

राष्ट्रपति के ही आदेश पर उनके कैरेक्टर रोल को भी आउटस्टैंडिंग एंट्री हुई। वर्ष 2012 से जून 16 तक वे एम्स में उप सचिव के पद पर तैनात रहे। यहां दो साल तक उनके पास एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी का भी चार्ज रहा। इस अवधि में उन्होंने भ्रष्टाचार के करीब दो सौ मामलों में कार्रवाई की।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मिला मैग्सेसे

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मैग्सेसे अवार्ड - फोटो : LOGO

इसमें सर्वाधित चर्चित प्रकरण वर्ष 1982 बैच के आईएएस अधिकारी (हिमाचल काडर) विनीत चौधरी के खिलाफ सीबीआई में केस दर्ज कराने के अलावा उन्हें चार्जशीट देना रहा। इसी तरह वर्ष 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी शैलेश यादव (तमिलनाडु काडर) के विरुद्ध भी विभागीय चार्जशीट जारी करने का प्रकरण सुर्खियों में रहा था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई को देखते हुए उन्हें जुलाई-15 में रमन मैग्सेसे अवार्ड दिया गया। गौरतलब है कि यह सम्मान पाने वाले संजीव चतुर्वेदी सबसे कम उम्र के सिविल सेवा अधिकारी हैं। उनके पूर्व तीन अधिकारी किरन बेदी, टीएन सेशन और जेएस लिंगदोह को ही यह सम्मान मिला है। 

केजरीवाल ने बनाया था चुनावी मुद्दा

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अरविंद केजरीवाल

संजीव का नाम तब भी चर्चा में आया था, जब सांसद जेपी नड्डा ने उन्हें सीवीओ के पद से हटाने के लिए लगातार आधा दर्जन पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखे। दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान संजीव को चीफ विजिलेंस अफसर पद से हटाने का मामला चुनावी मुद्दा भी बना था।

अरविंद केजरीवाल ने यहां तक वादा किया था कि सरकार आने पर वे संजीव को दिल्ली सरकार में एंटी करप्शन ब्यूरो का चीफ बनाएंगे। फरवरी-15 में केजरी ने केंद्र सरकार को इस बाबत पत्र भी लिखा था। डेढ़ साल तक तमाम पत्राचार के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नियुक्ति संबंधी मामलों की कैबिनेट समिति ने जून-16 में केजरीवाल का यह अनुरोध ठुकरा दिया।

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