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रेल लाइन पर पड़े ‘नमक’ के लिए जान गवां रहे वन्यजीव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 29 Mar 2018 09:43 PM IST
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हाथी
- फोटो : self
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राजाजी टाईगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरनी वाली रेल लाइन पर यात्रियों द्वारा फेंके गए स्वल्पाहार व भोजन के पैकेट ‘नमक’ के फेर में वन्यजीव अपनी जान गवां रहे हैं। यह बात सामने आने पर वन विभाग ने कासरों रेलवे स्टेशन से किलोमीटर 47 तक रेलवे लाइन से यह कचरा उठाने का अभियान शुरू किया है। इसके अलावा राजाजी पार्क के निदेशक की ओर से डीआरएम मुरादाबाद को नोटिस भी भेजा गया है।
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राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेन की टक्कर से हाथी समेत कई वन्यजीवों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। अब तक इससे 27 हाथियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लैपर्ड और हिरन सहित अन्य वन्य जीव भी अक्सर ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक हादसों के लिए केवल ट्रेन की तेज रफ्तार ही नहीं बल्कि रेल यात्रियों द्वारा फेंके जाने स्वल्पाहार व भोजन के पैकेट भी हैं। वन्यजीव इन्हीं पैकेटों में बचे-खुचे भोजन को खाने के लिए उतावले रहते हैं। खाने में नमक का स्वाद वन्यजीवों को काफी भाता है। खाने एवं पैकेटों में लगे नमक को चाटने के लिए वन्यजीव अक्सर पटरी के नजदीक आते जाते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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इसे देखते हुए राजाजी टाईगर रिजर्व प्रशासन की ओर से ट्रेन की पटरी से कूड़ा उठाए जाने का अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत कासरों रेलवे स्टेशन से किलोमीटर 47 तक कूड़ा उठाया जाएगा। इसके अलावा राजाजी टाईगर रिजर्व के निदेशक सनातन ने डीआरएम मुरादाबाद को नोटिस भेजा है। इसमें स्वल्पाहार व भोजन के पैकेट से आकर्षित होकर वन्यजीवों के रेलवे ट्रैक पर आने और दुर्घटना का शिकार होने की बात कही गई है। इसके अलावा नोटिस में ट्रैक पर स्वल्पाहार व भोजन के पैकेट फेंके जाने के संबंध में विभिन्न स्तरों पर रेलवे के उच्चाधिकारियों एवं वन विभाग के स्तर पर बैठकों के निर्णय पर कोई भी प्रगति न होने की बात कही गई है।
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वन्य जीवों के ट्रेन की चपेट में आने की एक प्रमुख वजह ट्रेन से फेंके जाने वाले स्वल्पाहार व भोजन के पैकेट हैं। इन पैकेटों में नमकीन एवं अन्य नमक लगे खाद्य पदार्थ होते हैं। इसी कचरे में नमक चाटने के लिए हाथी व अन्य वन्यजीव ट्रैक के नजदीक आकर ट्रेन से टकरा जाते हैं। इसके लिए कांसरो रेलवे स्टेशन से किलोमीटर 47 तक ट्रैक से यह कचरा उठाने का अभियान शुरू किया गया है। अब तक 12 बोरे कचरा उठाया जा चुका है।
-सनातन, निदेशक राजाजी टाईगर रिजर्व
कहां कितने हाथी
राजाजी टाईगर रिजर्व में 309 से अधिक हाथी हैं। वहीं रामनगर टाईगर रिजर्व में 850, कालागढ़ टाईगर रिजर्व में 185, कार्बेट टाईगर रिजर्व में 1035, देहरदून डिवीजन में 27 एवं शिवालिक वृत्त में 248 से अधिक गजराज हैं।
तीन हाथियों की मौत पर हुई थी तीन साल की सजा
ट्रेन की टक्कर से हाथियों की मौत के न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देशभर में मामले सामने आते हैं। इनमें 28 सितंबर 1998 को कासरों रेंज के जामुनखत्ता बीट में रेल की टक्कर से तीन हाथियों की मौत के मामले में रेल चालक को तीन साल की सजा हुई थी। हादसे में एक हथिनी और हाथी के दो बच्चों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। जबकि एक अन्य हाथी गंभीर घायल हो गया था। इस मामले में 25 नवंबर 2010 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून की अदालत ने जनता एक्सप्रेस के चालक विजय पाल निवासी रेलवे कॉलोनी मुरादाबाद को तीन साल कैद एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।