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सचिन तेंदुलकर को कोर्ट से बड़ी राहत, ये है पूरा मामला

Thu, 15 Jan 2015 04:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Thu, 15 Jan 2015 04:13 PM IST
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sachin tendulkar mussoorie new house.

महान क्रिकेटर और भारत रत्न सचिन को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

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नैनीताल हाईकोर्ट ने मसूरी स्थिति 'ढहलिया बैंक हाउस' के मालिक की विशेष अपील पर सुनवाई के बाद बुधवार को याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक ढहलिया बैंक हाउस भारत रत्न और महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का है। पिछले दिनों जब सचिन मसूरी आए थे तो वह अपने परिवार के साथ यहां शिफ्ट हुए थे। लेकिन कोर्ट में यह अपील सचिन के दोस्त संजय नारंग की ओर से दायर की गई थी।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। संजय नारंग ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर कर कहा था कि उनके ढहलिया बैंक हाउस में निर्माण कार्य चल रहा है।
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पूर्व में कैंट बोर्ड ने याचिकाकर्ता को ध्वस्तीकरण और बेदखली के नोटिस जारी किए थे। ध्वस्तीकरण और बेदखली के नोटिस के आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

पूर्व में एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को आदेशित किया था कि वह निचली अदालत में आपत्ति शपथपत्र के साथ पेश करें। याचिकाकर्ता ने एकलपीठ के इस आदेश को विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए वहां पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पारित किए।

अवैध निर्माण कराने का आरोप

sachin tendulkar mussoorie new house.

इस बंगले को ‘ढहलिया बैंक’ के नाम से जाना जाता है। यह बंगला संजय नारंग के नाम पर खरीदा गया है, पर सूत्रों का कहना है कि यह घर सचिन का ही है। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर मसूरी में सपरिवार नए बंगले में रहे ‌थे।

ढहलिया बैंक और विवाद साथ-साथ चलते रहे हैं। लंढौर छावनी परिषद ने भी ढहलिया बैंक के लिए कई बार चालान किया है। अब भी इसका मामला न्यायालय में चल रहा है।

क्या हैं आपत्तियां

संजय नारंग ने ढहलिया बैंक को आरएल दुग्गल से खरीदा था। संजय ने इसमें निर्माण के लिए अनापत्ति मांगी, लेकिन नहीं मिली। बाद में मरम्मत के नाम पर इस बंगले में भव्य निर्माण हुआ है।

बंगले के पास महत्वपूर्ण रक्षा संस्थान आईटीएम (प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान) है। छावनी और रक्षा संपदा के नियमों के मुताबिक 50 मीटर तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। मरम्मत के लिए भी रक्षा संस्थान से अनापत्ति लेना अनिवार्य है।

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