फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   rumors hot in uttarakhand lokayukt bill

लोकायुक्त बिल पर कहीं सत्ताधारी तो नहीं बना विभीषण

Thu, 30 Mar 2017 10:14 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 30 Mar 2017 10:14 PM IST
विज्ञापन
rumors hot in uttarakhand lokayukt bill
त्रिवेंद्र सिंह - फोटो : AmarUjala

लोकायुक्त बिल प्रवर समिति को भेजने के मुद्दे पर हुई सरकार की किरकिरी की चर्चाएं बुधवार को सियासी गलियारों में आम रही।

विज्ञापन


सत्ताधारी दल की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि सरकार की मंशा पहले से ही इसे प्रवर समिति को भेजने की थी, जिससे विपक्ष यह आरोप न लगा सके कि प्रचंड बहुमत के बूते सरकार ने मनमानी कर ली। मगर अंदरखाने में खबर यह है कि सरकार की इस मंशा की मुखबिरी किसी ने विपक्षी दल को कर दी। नतीजा विपक्ष को सत्ता पक्ष पर चढ़ाई का पूरा मौका मिल गया।

जानकारों की मानें तो मौजूदा लोकायुक्त बिल में तमाम विसंगतियां मौजूद हैं। इसमें लोकायुक्त द्वारा किसी मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने के अलावा कई अन्य अधिकार को लेकर पेच फंस सकता है। यही नहीं एक स्तर तक ज्यूडीशियरी भी इस बिल के तहत लोकायुक्त के दायरे में आने की बात कही गई है। सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने के वायदे पर अमल करते हुए भाजपा सरकार इसे विधानसभा में तो ले आई, मगर बाद में इस बात का अहसास हुआ कि ऐसी तमाम विसंगतियों का खामियाजा आगे चलकर उसे ही उठाना पड़ सकता है।
विज्ञापन


सूत्रों की मानें तो बिल को सदन में पेश करने के बाद यह तय किया गया कि इसे प्रवर समिति को भेज देंगे। दरअसल विपक्ष ने भी इस बाबत प्रस्ताव पहले ही सदन के समक्ष प्रस्तुत किया था, जो सरकार की मंशा को पूरा बल दे रही थी। खबर है कि सरकार में ही मौजूद एक प्रमुख नेता ने इस मंशा की खबर विपक्ष को कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर क्या था, विपक्ष ने अपनी रणनीति बदलते हुए मंगलवार को लोकायुक्त को प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव यह कहते हुए वापस ले लिया कि वे भी सुशासन के पक्षधर हैं और लोकायुक्त के गठन से भ्रष्टाचार पर करारा वार होगा। विपक्ष के इस सियासी दांव से सत्ता पक्ष के कदम ठिठक गए।

गौरतलब है कि पूर्व में जितने भी प्रमुख बिल प्रवर समिति को गए हैं, उनमें ज्यादातर विपक्ष की मांग पर ही गए। अब विपक्ष के इस अप्रत्याशित फैसले के चलते सरकार के पास से प्रवर समिति का आधार ही समाप्त हो गया। बाद में अपने पुराने तर्क को दोहराते हुए बिल को यह कहकर प्रवर समिति के पास भेजने की बात कही गई कि सरकार प्रचंड बहुमत पाने के चलते मनमानी करने की चेष्टा नहीं करेगी।

ये सरकार का रणनीतिक कदम है: पंत
वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि सरकार ने लोकायुक्त और स्थानांतरण विधेयक योजना पूर्वक प्रवर समिति को भेजा। सरकार चाहती तो दोनों विधेयकों को आसानी से पारित करा सकती थी। उसके पास पर्याप्त संख्या बल है। सरकार यह भी मानती हैं कि दोनों बिल फूलप्रूफ हैं।


मगर सवाल राज्य के 1.73 लाख कर्मचारियों और लोक सेवकों का भी है, जिन्हें इन दोनों विधेयकों से जोड़ने की आवश्यकता है। प्रवर समिति कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को सुझावों के लिए आमंत्रित करेगी। एक महीने के दौरान समिति की बैठकों के होंगी जिनमें लोक सेवकों से भी चर्चा की जाएगी। सभी वर्गों से बातचीत करने के उपरांत विधेयकों को आगामी सत्र में पारित कराया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed