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आरटीओ दफ्तर में भी ‘आफिस-आफिस’
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 22 Nov 2013 11:10 PM IST
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साहब, यह तो मजाक ही हो गई। आपका कर्मचारी ऐसी बात बोल रहा है कि जो सिर के ऊपर से जा रही है। अब आप ही बताइये मैं क्या करूं। जब वाहन संचालक ने एआरटीओ को बात बताई तो पहले वह मुस्करा उठे। उसके बाद वह बेहद गुस्सा हुए और कर्मचारी को जबरदस्त हड़काया और दुबारा ऐसी बात न करने की नसीहत दी।
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टैक्टर पर लगाना पड़ेगा स्पीड गवर्नर
असल में, एक ट्रैक्टर संचालक आरटीओ में फिटनेस सर्टिफिकेट लेने पहुंचा। संबंधित कर्मचारी के पास वह गया तो उसने बताया कि पहले ट्रैक्टर पर स्पीड गवर्नर लगाना होगा।
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इस पर संचालक ने उसे बताया कि उसके ट्रैक्टर में कंपनी से ही स्पीड गवर्नर लगा हुआ है। लिहाजा उसे सर्टिफिकेट दिया जाए।
संचालक का दिमाग घूमा
इस पर कर्मचारी ने कुछ सोचा और बोला कि ट्रैक्टर के पीछे लगी ट्राली में भी स्पीड गवर्नर लगा है क्या। अगर नहीं लगा है तो फिर सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। ट्रैक्टर संचालक का दिमाग घूम गया।
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उसने कहा जिस ट्राली में इंजन ही नहीं है उस पर क्यों गवर्नर लगाऊं। जब कर्मचारी ने उसकी बात न सुनी तो मजबूर होकर उसे एआरटीओ के पास जाना पड़ा।
रोडवेज की बसों में लगा हुआ है गवर्नर
उत्तराखंड परिवहन निगम की नई बसों में स्पीड गवर्नर पहले से लगा हुआ है। शुक्रवार को रोडवेज की छह बसें आरटीओ में सर्टिफिकेट लेने आई थी। सबको प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। वहीं कई वाहन कंपनी ही अब अपने वाहनों को गवर्नर से लेस कर रहे हैं। ताकि आगे दिक्कत न आए।