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राम मंदिर के निर्माण को लेकर विपक्षी पार्टियां भी समझती हैं जनमानस की भावना- मोहन भागवत

Wed, 03 Oct 2018 08:08 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 03 Oct 2018 08:08 AM IST
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Rss chief mohan bhagwat said Opposition parties never deny for built ram mandir
मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर अपने मन की बात रखी। उन्होंने कहा कि जनमानस की भावना स्पष्ट है कि मंदिर बनना चाहिए। इस भावना को समझकर कुछ पार्टी के ताकतवर लोग भी राम मंदिर का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे जनता की भावना को समझ चुके हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि भगवान राम देश के बहुसंख्यकों के पूजनीय हैं। इसलिए राम मंदिर का निर्माण जनमानस की भावना है और मंदिर यथास्थान पर ही बनना चाहिए। यह बात सभी लोग अच्छी तरह जानते और समझते भी हैं। इसलिए अब इसका विरोध करने से पहले लोगों को सौ बार सोचना होगा। 
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यह बात उन्होंने सोमवार को पतंजलि में आयोजित साधु स्वाध्याय संगम के समापन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने साधु शब्द को अति महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि साधु को इतना काबिल बनना चाहिए कि किसी भी अमीर और वजीर की उसे जरूरत न पड़े। 

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साधु का काम समाज को जोड़ना होता है

आज बहुत से लोग सुख की चाह में बाहर की दौड़ लगा रहे हैं। जबकि यह बात समझनी चाहिए कि सुख मन के अंदर है। पहले उसे प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु का काम समाज को जोड़ना होता है। पहले गांव, जिला प्रांत और देश को जोड़ें, पूरी दुनिया खुद ही जुड़ जाएगी।

उन्होंने कहा कि पहला कार्य अच्छा करना नहीं बल्कि अच्छा कार्य करने के लिए माहौल बनाना होता है और इसके लिए कुर्सी पर माहौल बन जाने तक बने रहना जरूरी है। संघ प्रमुख ने कहा कि जब कुर्सी पर बैठे लोगों को यह डर सताने लगता है कि मैं ऐसा कार्य नहीं करूंगा तो कुर्सी बनी रहेगी या चली जाएगी, तब व्यक्ति गलत कार्य करता है।

योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया। 

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