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रूट डायवर्जन प्लान से बढ़ी मुश्किल

Wed, 25 Dec 2013 05:05 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 25 Dec 2013 05:05 PM IST
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route diversion makes trouble in city
रूट डायवर्जन प्लान का खामियाजा विक्रम और सिटी बस यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। आईएसबीटी या कावंली रोड से आने वाले विक्रम तहसील चौक से ही लौट जा रहे हैं।
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विक्रम के ना आने से लैंसडौन, कनक चौक या रोजगार तिराहा जाने वाले यात्रियों को दर्शनलाल चौक से पैदल परेड करनी पड़ रही है। इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है।
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विक्रम चालकों का है कहना
विक्रम चालकों का साफ कहना है कि दर्शनलाल चौक से लैंसडौन चौक की दूरी केवल दो सौ मीटर है। पुलिस के नए रूट डायवर्जन के कारण दो सौ मीटर की यह दूरी चार किमी की हो गई है। इसलिए सवारियों को तहसील चौक पर ही छोड़ा जा रहा है।

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इससे सबसे ज्यादा प्रभावित आईएसबीटी, सीमाद्वार, कावंली रोड, धर्मपुर-रिस्पना पुल और माजरा से आने वाले यात्री हो रहे हैं।

सवारियों की मुश्किल
आईएसबीटी से रोजगार चौक आ रही छात्रा अंजली कुलपति ने बताया कि विक्रम वाले ने उन्हें तहसील चौक पर ही छोड़ दिया। अब कई किलोमीटर की दूरी तय कर रोजगार चौक जाना है। रात होने से परिवार के लोगों को भी चिंता हो जाती है।

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शम्मी बसंल बताते हैं कि पुलिस की व्यवस्था चाहे जो हो लेकिन विक्रम संचालकों को पहले ही बता देना चाहिए कि वे सवारी कहां उतारेंगे। ऐसे में विवाद की स्थिति नहीं होगी।

सिटी बस और विक्रम चालक आमने-सामने
सिटी बस संचालक पूरी तरह से पुलिस के नए डायवर्जन प्लान के विरोध में आ गए हैं। उनका दो टूक कहना है कि आरटीए की बैठक में उनके रूट तय होते हैं। इसलिए पुलिस को इससे छेड़छाड़ का अधिकार नहीं है। वहीं विक्रम संचालक पूरी व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं।

क्या कहती है यूनियन
प्रेमनगर-परवल रूट के संरक्षक विजय वर्धन डंडरियाल ने कहा कि सिटी बसों के रूट संभागीय परिवहन प्राधिकरण तय करता है। पुलिस के पास उसमें बदलाव करने का अधिकार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस पूरी तरह से इस व्यवस्था को अमल में लाती है तो सिटी बस संचालक इसका विरोध करेंगे।

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उधर, विक्रम संचालकों ने इसका समर्थन किया है। विक्रम के कौलागढ़ रूट के अध्यक्ष संजय अरोड़ा ने बताया कि पुलिस ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यह सब किया है।

शुरूआत में थोड़ी समस्या सबको हो सकती है लेकिन शहर के हित में यह किया जा सकता है।
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