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अब घंटों का सफर मिनटों में
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Jun 2014 05:19 PM IST
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केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से फारेस्ट क्लियरेंस मिलने के साथ ही रोपवे प्रोजेक्ट की राह साफ हो गई है।
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जानकीचट्टी से यमुनोत्री और ठुलीगाड से पूर्णागिरी रोपवे प्रोजेक्ट का काम जल्द शुरू हो जाएगा। पीपीपी मोड में जल्द ही दोनों रोपवे का निर्माण शुरू हो जाएगा।
सुरकंडा रोपवे और हेमकुंड साहिब रोपवे की भी उम्मीद
उम्मीद है कि इसी साल सुरकंडा रोपवे और हेमकुंड साहिब रोपवे को भी फारेस्ट क्लियरेंस मिल जाएगा।
मंत्रालय की स्टेट नोडल एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक पांच किलोमीटर लंबे जानकीचट्टी-यमुनोत्री रोपवे प्रोजेक्ट पर करीब 70 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अभी जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक चढ़ने में लंबा वक्त लगता है।
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करीब एक साल से इस प्रोजेक्ट की फाइल इधर-उधर घूम रही थी। इसके अलावा कुमाऊं में टनकपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पूर्णागिरी मंदिर तक भी सफर बेहद आसान हो जाएगा।
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यहां तीन किलोमीटर लंबे रोपवे पर 35 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नोडल अधिकारी राजेंद्र महाजन ने बताया कि हाल ही में इन दो रोपवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली है।
इसके अलावा कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर का 15 करोड़ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के 50 करोड़ के रोपवे प्रोजेक्ट की फाइल मंत्रालय के विचाराधीन है। उम्मीद है कि जल्द ही फॉरेस्ट क्लियरेंस मिल जाएगा।
खास बात यह है कि जानकीचट्टी-यमुनोत्री, ठुलीगाड-पूर्णागिरी और कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे प्रोजेक्ट के एग्रीमेंट भी साइन हो चुके हैं।
रामबाड़ा प्रोजेक्ट पर सुस्ती
गत वर्ष जून में केदारनाथ और रामबाड़ा में भारी तबाही के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने यहां रोपवे प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।
लेकिन, अब इस मामले में कुछ नहीं हो पाया है। वन महकमे ने अब तक इस प्रोजेक्ट की फाइल तक तैयार नहीं की है। ऐसे में यह घोषणा परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही। इसके अलावा नीलकंठ रोपवे प्रोजेक्ट भी घोषणा से आगे नहीं बढ़ पाया।
कब खत्म होगा मसूरी का इंतजार
दून से मसूरी तक रोपवे प्रोजेक्ट की घोषणा आठ साल पहले हुई थी। 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की निविदाएं सरकार ने कई बार निकाली लेकिन बाद में निरस्त कर दी गई।
लगातार बढ़ रही पर्यटकों की भीड़ के बीच लंबे-लंबे जाम से मुक्ति में यह प्रोजेक्ट कारगर साबित हो सकता है। जानकारी के मुताबिक इसकी फाइल मंत्रालय में गई थी लेकिन वहां से कुछ आपत्तियां आई थी।
इन आपत्तियों का जवाब अभी तक नहीं भेजा गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि का अधिग्रहण भी होना था।