सवालों के घेरे में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना, जिम्मेदार कौन?
- बिना टीएसी के चल रही करोड़ों की योजना
- रिस्पना और बिंदाल नदियों के सुंदरीकरण के लिए चलाई जा रही योजना
- बिना टीएसी की अनुमति लिए परियोजना निर्माण करना पूरी तरह अवैध
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राजधानी में रिस्पना और बिंदाल नदियों के सुंदरीकरण के लिए चल रही रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना तमाम नियम कायदों को दरकिनार कर बनाई जा रही है। योजना का पहला चरण समाप्त होने के बावजूद अभी तक टेक्निकल एसेसमेंट कमेटी (टीएसी) की अनुमति नहीं ली गई है। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 25 करोड़ से अधिक की योजनाओं को स्टेट टीएसी के साथ ही भारत सरकार की हाई पावर टीएसी से भी अनुमोदन होना अनिवार्य है।
एमडीडीए दून में रिस्पना और बिंदाल नदियों के सुंदरीकरण के लिए रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना चला रही है। इसके तहत पहले चरण में करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से रिवर रिचार्जिंग का काम किया जा रहा है। दूसरे चरण में नदियों को चैनलाइज कर किनारों का सुंदरीकरण करने की योजना है।
करोड़ों की इस योजना के तहत शहर के बाहरी क्षेत्रों में काम भी शुरू हो गया है। एमडीडीए ने शुरुआत से ही योजना निर्माण में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। योजना को लेकर सवाल उठने के बाद आनन-फानन में वाटर एंड पावर कंसलटेंसी सर्विसेज (वेबकॉस) से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाई गई। शासन की इनवेस्टमेंट क्लीयरेंस कमेटी की अनुमति से तुरंत योजना पर काम शुरू कर दिया गया। इसमें शासन के कुछ बड़े तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
यह है योजना के अनुमोदन का नियम
भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार 25 करोड़ तक की योजनाएं राज्य तकनीकी सलाहकार समिति के अनुमोदन के बाद गंगा फ्लड कंट्रोल कमीशन पटना (जीएफसीसी) की मंजूरी को भेजनी आवश्यक है। स्टेट टीएसी में सिंचाई विभाग, गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना, रेलवे, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज, फॉरेस्ट, केंद्रीय जल आयोग और राज्य स्थित समस्त अभियंत्रण विभागों के अधिकारी इसमें शामिल होते हैं।
स्वीकृत बड़ी योजनाओं को केंद्र सरकार की हाई पावर टेक्निकल एसिसमेंट कमेटी के सामने रखा जाता है। इस कमेटी में केंद्र सरकार के 26 विभागों के उच्चाधिकारी शामिल होते हैं। यहां से अनुमति मिलने के बाद नीति आयोग योजना को इनवेस्टमेंट क्लीयरेंस देता है।
क्या कहता है एक्ट
नॉर्दन इंडिया कैनाल एंड ड्रेनेज एक्ट 1856 के अनुसार, नदी-नालों पर सिंचाई विभाग का अधिकार होगा। अत: वहां कोई भी काम करने या गतिविधि संचालित करने से पहले सिंचाई विभाग से एनओसी लेनी अनिवार्य होगी। एमडीडीए ने काम शुरू करने से पहले एनओसी लेने की कोई जरूरत नहीं समझी।
क्या कहते हैं अधिकारी?
एमडीडीए ने योजना के लिए मेरे स्तर से एनओसी नहीं ली है। अगर शासन ने अपने स्तर से अनुमति दी हो तो इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं। बाकि विभागीय स्तर पर हमसे कोई बातचीत नहीं हुई है।
-राजेंद्र चालिसगांवकर, मुख्य अभियंता व विभागाध्यक्ष, सिंचाई विभाग
प्रोजेक्ट फाइनेंस की टीएसी से अप्रूव्ड है। शासन की व्यय-वित्त समिति ने पैसा रिलीज किया है। हमने सिंचाई की एजेंसी आईआरए से निवेदन किया। तीन बार लिखने के बाद भी हमें कोई जवाब नहीं मिला, जिस पर हमने वेबकॉस को चुना। मैंने खुद विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। सिंचाई विभाग के संजीव जैन, इंजीनियर डेप्युटेशन पर हमारे साथ काम कर रहे हैं। कंसलटेंसी के लिए ली गई वेबकॉस भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की एजेंसी है। टीएसी से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। हमें इस संबंध में सिंचाई विभाग का कोई पत्र आज तक नहीं मिला। अगर प्रक्रिया में कुछ खामी थी तो सिंचाई विभाग ने कभी बताया क्यों नहीं।
-आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए