पीले सूट वाली मेरी... हरी साड़ी वाली तेरी
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हरिद्वार में दशकों से रोडवेज के बाहर रिक्शा वाले बसों में बैठी सवारियों को उनकी वेशभूषा के आधार पर बुक कर लिया करते आ रहे हैं।
बस अड्डे में प्रवेश करती बसों की खिड़कियों पर लटककर सूट वाली मेरी और साड़ी वाली तेरी का शोर खूब सुनायी पड़ता है।
अब हरिद्वार की परंपराओं के वाहक पुरोहित समाज का अजीब गोरखधंधा चल पड़ा है। यात्रियों के गले में बंधी अस्थियों की गुथलियों के आधार पर यात्रियों की बुकिंग बस अड्डे अथवा रेलवे स्टेशन के बाहर रोज की जाती है।
अब, लाल गुथली वाला तेरा... सफेद वाला मेरा
हरिद्वार में अवैध घाटों पर पुरोहित बनकर पहले अवैध लोग अस्थि प्रवाह कराते थे, किंतु अब पुरोहितों के परिजन भी कराने लगे हैं। जिस प्रकार पहले रिक्शा वाले बस में बैठी सवारियों को उनकी वेशभूषा के आधार पर बुक कर रिक्शा में बैठाकर गन्तव्य पर पहुंचा देते थे, उसी प्रकार अब पुरोहितों के युवक भी करने लगे हैं।
ये युवक यात्रियों के गले में बंधी गुथलियों के आधार पर अस्थि प्रवाह का अधिकार यात्रियों के बसों में बैठे बैठे ही लेते हैं। इस नयी परंपरा अवैध घाटों पर अस्थि प्रवाह को और बढ़ावा दिया है।
चूंकि हरकी पैड़ी और कनखल के सती घाट पर पुरोहित स्वयं विद्यमान रहते हैं, अत: बसों से यात्रियों को बसों से उतारकर ये युवक अवैध रूप से अन्य घाटों पर अस्थि प्रवाह कराकर धन ऐंठते हैं।
अवैध अस्थि प्रवाह आज तक नहीं रुका
अखाड़ों और गंगा सभा के प्रतिनिधियों ने कईं बार ऐसे युवाओं को खदेड़ा भी है लेकिन अवैध अस्थि प्रवाह आज तक नहीं रुका।
जिलाधिकारी डॉ निधि पांडेय के नेतृत्व में अधिकारियों और सामाजिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने गंगा के ऐसे अनेक घाटों का दौरा किया जहां अस्थि प्रवाह हो रहा था।
जिलाधिकारी ने आदेश दिया है कि घाटों पर पुलिस की गश्त करायी जाएगी और ऐसे लोगों को जेल भेजा जाएगा। जो लोग रोड़वेज और रेलवे स्टेशन से यात्रियों को अवैध घाटों पर ले जाते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुरोहितों को बदनाम कर रहे अवैध व्यक्ति
पुरोहित समाज के नाम पर कुछ अवैध लोग बसों और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सौदा करते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि तमाम कोशिशों के बावजूद ऐसे असामाजिक तत्वों को हटाया नहीं जा सका। प्रशासन की सख्ती निश्चित रूप से काम करेगी। जिला प्रशासन का सहयोग हर स्तर पर किया जाएगा।
-वीरेंद्र कीर्तिपाल, अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद
नियमित घाटों पर ही हो अस्थि प्रवाह
अस्थि प्रवाह के लिए प्राचीन काल से घाटों का निर्धारण स्वयं पुरोहित समाज द्वारा किया गया है। परंपराओं के हिसाब से उन्हीं दो स्थलों पर अस्थि प्रवाह किया जाना चाहिए। व्यवस्था की दृष्टि से वीआईपी के आने पर अन्य घाट का प्रबंध किया गया है। शेष किसी भी घाट पर अस्थि प्रवाह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मैंने स्वयं स्थल निरीक्षण कर तीर्थ की मर्यादा बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
-डॉ निधि पांडेय, जिलाधिकारी
किसी का पक्ष नहीं लेगी सभा
जो लोग रोड़ी मैदान, सुभाष घाट, गऊ घाट, राम घाट, बेलवाला, गणेश घाट, सिंहद्वार आदि पर अवैध रूप से अस्थि प्रवाह कराकर तीर्थयात्रियों की भावनाओं का उपहास उड़ा रहे हैं, उन्हें पुरोहित नहीं माना जा सकता। प्रशासन यदि ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है तो गंगा सभा किसी का पक्ष नहीं लेगी। केवल हरकी पैड़ी और कनखल के सती घाट पर ही अस्थि प्रवाह शास्त्र सम्मत है।
-अशोक त्रिपाठी, अध्यक्ष गंगा सभा