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पढ़ें, महिला सशक्तिकरण की अनूठी कहानी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 30 Sep 2014 12:17 PM IST
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ऋतु कक्कड़ शर्मा, बहरीन का ऐसा नाम है जो न केवल केक, कप केक, कुकीज के मीठे से व्यवसाय की मालकिन हैं, बल्कि नियति नाम की एनजीओ के माध्यम से हिंदुस्तानी महिलाओं के सशक्तिकरण का काम भी कर रही हैं।
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कई महिलाओं की कर रही मदद
उन्हें शार्ट टर्म प्रोजेक्ट मुहैया करा वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में मदद कर रही हैं। ऋतु का मासिक टर्नओवर लाखों में है। मूल रूप से देहरादून की रहने वाली ऋतु ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोजफ्स एकेडमी से पूरी की। इसके बाद एमबीए करने पुणे चली गईं।
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यहां एसआईएमएस से इंटरनेशनल मार्केटिंग में एमबीए पूरा करने के बाद ऋतु के पास नौकरी केभी रास्ते खुले थे, लेकिन उन्होंने स्व-व्यवसाय को प्राथमिकता दी। सर्वे के बाद केक, कुकीज का व्यवसाय करने की योजना बनाई। इसके लिए पहले विल्टन केक डेकोरेशन से सर्टिफिकेट लिया।
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इसके बाद यूके से ही केक डेकोरेशन में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की। ताकि अपने जैसी कई महिलाओं को रोजगार भी प्रदान कर सकें। 38 वर्षीय ऋतु आज अपने ख्वाबों की ताबीर पा चुके हैं। उनके पति आशीष का मिडिल ईस्ट में सिक्योरिटी कंसल्टेंसी का कारोबार है।
आशीष टेलीकम्युनिकेशन कंपनी बाटेल्को के साथ केवल तीन माह के कांट्रेक्ट पर 2006 में वह बहरीन गए थे, लेकिन वहां का सरल जीवन इतना पसंद आया कि वहीं बस गए।
इनीशियल कैपिटल कांटेक्ट न होने की वजह से पहले अन्य कंपनियों के कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी, फिर इनीशियल कैपिटल जुटा अपनी कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया। उनकी कंपनी का इस वक्त बैंक, इंश्योरेंस, डाटा वेयरिंग में दबदबा है।
डायमंड की भी पारखी ऋतु
ऋतु डायमंड की भी पारखी हैं। डायमंड के प्रति अपने प्यार की वजह से उन्होंने कुछ समय दिल्ली में डायमंड का बिजनेस भी किया, लेकिन पति के साथ बाद में बहरीन शिफ्ट हो जाने की वजह से वह अपने काम को जारी नहीं रख पाईं। लिहाजा, बाद में अपनी पसंद केक को व्यवसाय का रूप दिया।
जो महिलाएं खुद को कमजोर समझ अपने पांव किसी भी क्षेत्र में बढ़ाने से हिचकती हैं, उन्हें समझना चाहिए कि वह शक्तिस्वरूपा हैं। जो खुद शक्तिपुंज हैं, उनके लिए बेड़ी की क्या बिसात? अपने को पहचानें और आगे बढ़ें।
- ऋतु कक्कड़ शर्मा